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रविवार, 28 अक्तूबर, 2007 को 21:48 GMT तक के समाचार

सुशीला सिंह
बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

संसदीय समिति के समक्ष सेन की पेशी

भारत-अमरीका परमाणु समझौते का विरोध करने वालों को 'हैडलेस चिकन' बताने वाले अमरीका में भारत के राजदूत रोनेन सेन सोमवार को लोकसभा के समझ पेश हुए और उनसे विशेषाधिकार समिति ने जवाब तलब किया.

उनकी पेशी एक बंद कमरे में हुई और उसका विवरण मीडिया को अभी तक नहीं दिया गया है.

सेन ने रीडिफ़ डॉट कॉम को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि '' इसे (परमाणु समझौता) यहाँ राष्ट्रपति और वहाँ कैबिनेट ने पारित किया, तो फिर सिरकटे मुर्गे (हेडलेस चिकन) की तरह क्या फड़फड़ाना.''

रोनेन सेन के बयान पर संसद के दोनों सदनों में भारी हंगामा हुआ था और सदन की कार्यवाही कई दिन तक प्रभावित रही थी.

इस मुद्दे पर विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी को सफ़ाई देनी पड़ी थी.

प्रणव मुखर्जी ने राजदूत का बचाव करते हुए कहा था कि "उनके बयान को ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है और उन्होंने अपने बयान के लिए माफ़ी माँग ली है."

रोनेन सेन का बयान विदेश मंत्री ने संसद में पढ़कर सुनाया था, जिसमें उन्होंने कहा था, "मैंने अनौपचारिक बातचीत में अपने विचार प्रकट किए थे और मेरे विचार किसी व्यक्ति या संस्था के बारे में नहीं बल्कि मीडिया के अपने कुछ दोस्तों के बारे थे, फिर भी अगर किसी की भावना को चोट पहुँची है तो मैं माफ़ी माँगता हूँ."

लेकिन सांसदों के भारी विरोध को देखते हुए इस मामले को दोनों सदनों की विशेषाधिकार समितियों को सौंप दिया गया था.

लोक सभा के बाद दो नवंबर को राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति रोनेन सेन से स्पष्टीकरण माँगेगी.

संविधान के जानकार सुभाष कश्यप का कहना है कि इस समिति में सत्ताधारी और विपक्षी दलों के सदस्य होते है और सभी को सवाल पूछने का अधिकार होता है.

समिति के सदस्य जो भी सवाल पूछेंगे और जो जवाब आएँगे, उनकी रिकार्डिंग होगी और उसके बाद विशेषाधिकार समिति निर्णय लेगी.