रविवार, 28 अक्तूबर, 2007 को 20:07 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
बारहवाँ विश्व झील सम्मेलन सोमवार से राजस्थान के जयपुर शहर में शुरू हो रहा है.
इसमें विश्वभर के 700 से अधिक विशेषज्ञ एवं पर्यावरणविद् भाग लेंगे और वे झीलों के संरक्षण के उपायों पर विचार करेंगे.
इस सम्मेलन का उदघाटन भारत की राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल करेंगी.
झील सम्मेलन में दुनियाभर की झीलों और नम भूमि पर मंडरा रहे ख़तरे से निबटने के उपायों पर विचार किया जाएगा.
पर्यावरणविदों का मानना है कि झीलों का अतिक्रमण, उनमें बढ़ती गाद और पानी की निकासी ये चिंता का विषय है.
इस सम्मेलन में 40 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे. इसमें जापान के सबसे अधिक 60 और चीन के 30 प्रतिनिधि शामिल हैं.
सम्मेलन में पर्यावरणविद्, ग़ैरसरकारी संगठनों के प्रतिनिधि और सरकारी नुमांइदे हिस्सा लेंगे.
भारतीय दल का नेतृत्व केंद्रीय वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री नमो नारायण मीणा कर रहे हैं.
उनका कहना था कि अभी भारत में झीलों के संरक्षण के लिए कोई क़ानून नहीं है. इसके लिए कैसा ढांचा तैयार किया जाए, इस पर विचार चल रहा है.
उन्होंने बताया कि केंद्रीय झील प्राधिकरण गठित करने का भी सुझाव सामने आया है.
मीणा का कहना था कि भारत में 2700 प्राकृतिक झीलें हैं और लगभग 65 हज़ार मानव निर्मित छोड़ी-बड़ी झीलें हैं जिनके संरक्षण की आवश्यकता है.
उनका कहना था कि पहले ख़तरा शहरी झीलों को था लेकिन अब यह गाँवों तक जा पहुँचा है.