शुक्रवार, 26 अक्तूबर, 2007 को 06:00 GMT तक के समाचार
बर्मा की राजधानी रंगून में शुक्रवार को सैकड़ों की तादाद में दंगा निरोधक पुलिस की तैनाती की ख़बरें मिल रही हैं.
जानकारी के कुछ प्रमुख धार्मिक स्थलों के आसपास पुलिस की बड़ी तादाद में तैनाती की गई है.
इनमें वे धार्मिक स्थल भी शामिल हैं जहाँ से पिछले एक महीने के दौरान लोकतंत्र समर्थकों के कई प्रदर्शन होते रहे हैं.
ग़ौरतलब है कि बर्मा में सैनिक सरकार के विरोध में चल रहे आंदोलन में एक महीने पहले तेज़ी आई थी जिसे दबाने के लिए सैनिक शासन ने कड़े क़दम उठाए थे.
इन सरकारी कोशिशों को अमानवीय बताते हुए सैनिक सरकार पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप भी लगे और संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय के कई देशों ने बर्मा पर दबाव भी बनाया है.
इस बीच शुक्रवार को बर्मा के लिए संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी जापान के प्रधानमंत्री से मुलाक़ात करने वाले हैं.
बातचीत
हालांकि शुक्रवार को इस ताज़ा सरकारी क़दम से पहले लोकतंत्र समर्थक नेता आँग सान सू ची की मुलाकात एक वार्ताकार से कराई गई थी.
पर इससे पहले भारत, रूस और चीन बर्मा के ताज़ा घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कह चुके हैं कि बर्मा पर आर्थिक प्रतिबंध लगाने के निर्णय से सहमत नहीं हैं.
बर्मा की जानी-मानी नेता आँग सान सू ची 12 साल से नज़रबंद हैं और अगर बर्मा में वाक़ई लोकतंत्र की ओर कोई भी क़दम बढ़ाया जाना है तो उसमें आँग सान सू ची और उनकी पार्टी नेशनल लीग फ़ॉर डेमॉक्रेसी की अहम भूमिका होगी.
पिछले कुछ सप्ताहों से तेज़ हुए लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के दौरान कुछ लोगों की मौत हो गई और हज़ारों लोगों को हिरासत में ले लिया गया था.