गुरुवार, 25 अक्तूबर, 2007 को 12:14 GMT तक के समाचार
पाकिस्तानी निर्वाचन आयोग ने चुनाव आचार संहिता का मसौदा जारी करते हुए राजनीतिक पार्टियों से न्यायपालिका और सेना की आलोचना से परहेज़ करने को कहा है.
पाकिस्तान में अगले साल जनवरी में चुनाव होने हैं और निर्वाचन आयोग का कहना है कि वह इसे शांतिपूर्ण तरीक़े से संपन्न कराना चाहता है.
राजनीतिक पार्टियों को इस मसौदे पर विचार-विमर्श करने और सुझाव देने के लिए तीन नवंबर तक का समय दिया गया है.
इस्लामाबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस में निर्वाचन आयोग के सचिन कुंवर मोहम्मद दिलशाद ने कहा, ''पूरी दुनिया की नज़रें हम पर हैं इसलिए ये चुनाव काफ़ी महत्वपूर्ण हैं.''
पिछले कुछ समय से न्यायपालिका और सेना की भूमिका राजनीतिक चर्चा के दायरे में रही है और चुनाव आयोग इस प्रवृत्ति को रोकना चाहता है.
निंदा की छूट
इस महीने के शुरू में सैनिक शासक परवेज़ मुशर्रफ़ को सुप्रीम कोर्ट से राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की इजाज़त मिलने के बाद से न्यायपालिका भी विवादों में आ गया है.
वकीलों और उनके समर्थकों ने इसके ख़िलाफ़ आंदोलन करते हुए कहा कि यह देश के उस क़ानून के ख़िलाफ़ है जिसके मुताबिक एक सरकारी कर्मचारी अपनी सेवानिवृत्ति के दो साल तक कोई राजनीतिक पद नहीं संभाल सकता.
जनरल मुशर्रफ़ के राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की योग्यता को चुनौती देने वाली याचिका अभी भी सुप्रीम कोर्ट के पास लंबित है.
कुंवर दिलशाद ने कहा, ''मसौदे के मुताबिक संसदीय चुनाव में उम्मीदवार नैतिक सीमा में रहते हुए एक-दूसरे की आलोचना कर सकेंगे. हालांकि प्रतिद्वंद्वियों के निजी जीवन के बारे में बात करने की छूट नहीं होगी.''
इसके अलावा उम्मीदवारों को अपने प्रतिद्वंद्वियों के घर के सामने सभा करने की भी छूट नहीं होगी.
आचार संहिता के अनुसार, सार्वजनिक पैसे से किसी भी मीडिया में चाहे वह सरकारी हो या निजी राजनीति अभियान चलाने की इजाज़त नहीं होगी.
जब यह ध्यान दिलाया गया कि सत्ताधारी पार्टी पहले से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इस तरह का अभियान चला रही है तो कुंवर दिलशाद ने कहा कि इसका उल्लंघन करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई तभी की जा सकती है जब यह लागू हो जाए.