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गुरुवार, 25 अक्तूबर, 2007 को 14:40 GMT तक के समाचार

शादी पंजीकरण की अनिवार्यता 'सही नहीं'

भारत में विवाह का पंजीकरण सभी समुदायों के लिए अनिवार्य करने के सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड ने आपत्ति जताई है.

जबकि सामाजिक कार्यकर्ताओं और कुछ दूसरे संगठनों ने इसका स्वागत किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि शादी के पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का उसका पिछले साल का आदेश सभी वर्गों और समुदायों पर लागू होता है और इसे लागू करने के लिए तीन महीने के भीतर ज़रूरी क़ानून बनाए जाएँ.

इस फ़ैसले पर प्रतिक्रिया जताते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के प्रवक्ता सैयद क़ासिम रसूल इलियास ने कहा कि मुस्लिम संगठन इससे सहमत नहीं हैं.

उन्होंने कहा, ''सुप्रीम कोर्ट सोचता है कि पंजीकरण से औरतों को सुरक्षा मिलेगी, इस लिहाज से यह सही क़दम है. लेकिन जहाँ तक मुसलमानों का सवाल है, हमारे यहाँ पहले से ही इसका रिवाज़ है.''

वे कहते हैं कि सभी शादियों का अनिवार्य पंजीकरण सही नहीं है क्योंकि इसका व्यावहारिक तौर पर क्रियान्वयन संभव नहीं है. ख़ासतौर पर भारत जैसे देश में जहाँ शिक्षा का स्तर काफ़ी कम है.

क़ासिम रसूल इलियास इससे जुड़ी दूसरी समस्या पर भी ध्यान दिलाते हैं. उनका कहना है कि क़ानून के तहत पंजीकरण के लिए तय उम्र के बाद शादी होनी चाहिए, जबकि मुस्लिम समुदाय में शादी को लेकर उम्र की कोई बंदिश नहीं है.

दूसरा पक्ष

दूसरी ओर लखनऊ के संगठन भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की नाईश हसन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का स्वागत किया जाना चाहिए और इस पर पूरी तरह से अमल किए जाने की व्यवस्था होनी चाहिए.

वह आगे कहती हैं, ''मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक मर्दाना संगठन है, जबकि इस तरह के मसले सीधे महिलाओं से जुड़े होते हैं.''

उन्होंने लॉ बोर्ड को एक एनजीओ करार दिया और कहा कि वे लोग अपनी बात ऐसे रखते हैं जैसे मुस्लिमों के अकले प्रतिनिध हों.

नाईश हसन कहती हैं, ''हमारे देश में एक संविधान है और हम अपने अधिकारों की लड़ाई इसी संविधान के दायरे में रहकर लड़ना चाहते हैं. हमें कोई दूसरी वैकल्पिक संस्था नहीं चाहिए.''

सामाजिक कार्यकर्ता और आर्यसमाजी स्वामी अग्निवेश का भी कहना है कि यह फ़ैसला स्वागत योग्य है.

उन्होंने कहा, ''मैं समझता हूँ कि यह काम बहुत पहले हो जाना चाहिए था. लगता है कि सरकार कुछ कठमुल्लाओं के सामने झुकने के लिए मज़बूर हो रही है. इसलिए सुप्रीम कोर्ट को बार-बार सरकार को कहना पड़ रहा है कि स्पष्ट दिशा-निर्देश ज़ारी करें, कानून बनाएं.''

स्वामी अग्निवेश ने आगे कहा, ''बिना पंजीकरण की शादी महिलाओं के ऊपर ज़ुर्म का ज़रिया रही है. इस फ़ैसले से बाल-विवाह, बहु-विवाह और जबरन विवाह पर रोक लगेगी. महिलाओं के लिए यह बहुत बड़ी राहत है.''

उन्होंने कहा कि आर्य समाज की शादियाँ निश्चित रूप से पंजीकृत होती है. पहले एसडीएम, डीएम के सामने शपथ पत्र देना होता है. फिर शादी संपन्न होती है और उसके बाद आर्य समाज प्रमाण पत्र देता है.