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बुधवार, 24 अक्तूबर, 2007 को 10:27 GMT तक के समाचार

कोयंबटूर धमाकों के लिए 31 को उम्रक़ैद

भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के कोयंबटूर में 1998 में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में बुधवार को मुख्य अभियुक्त एसए बाशा समेत 31 लोगों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.

बाशा प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन अल उम्मा के संस्थापक नेता हैं. समाचार एजेंसियों के अनुसार कोयंबटूर की विशेष अदालत ने अल उम्मा के महासचिव मोहम्मद अंसारी को भी आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.

एसए बाशा को धमाकों की साज़िश रचने और बम रखने का दोषी पाया गया था.

बाशा को उम्र क़ैद और तीन साल के कठोर कारावास की सज़ा सुनाई गई है जबकि अंसारी को दोहरी उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.

इस मामले में 168 लोगों को गिरफ़्तार किया गया था. एक व्यक्ति सरकारी गवाह बन गया जबकि एक अन्य की हिरासत में मृत्यु हो गई.

अदालत ने इसी साल एक अगस्त को 166 अभियुक्तों में से 70 को दोषी क़रार दिया था. जज ने इनमें से 31 दोषियों को बुधवार को सज़ा सुनाई.

ये लोग लगभग 10 साल से जेल में हैं.

आडवाणी की चुनावी रैली

ग़ौरतलब है कि 14 फ़रवरी 1998 को भारतीय जनता पार्टी के नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कोयंबटूर में चुनावी रैली को संबोधित करना था.

उनकी रैली से कुछ ही देर पहले हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 58 लोग मारे गए थे और 250 से अधिक लोग घायल हो गए थे.

पुलिस ने अपनी जाँच में प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन अल उम्मा को धमाकों के लिए ज़िम्मेदार ठहराया था.

पुलिस का कहना था कि ये सिलसिलेवार बम धमाके 1997 में नवंबर-दिसंबर में हुए सांप्रदायिक दंगों की कड़ी थे.

29 नवम्बर 1997 को ट्रैफ़िक कॉंस्टेबल सेल्वराज की हत्या के बाद कोयंबटूर में दंगे भड़क उठे थे.

इस मामले की जाँच कर रही सीबी-सीआईडी की विशेष टीम ने सेल्वराज की हत्या के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़कने की बात की पुष्टि की थी.

पुलिस का दावा था कि इन दंगों का बदला लेने के लिए ही अल उम्मा के एसए बाशा, मोहम्मद अंसारी और अन्य ने बम धमाकों की साज़िश रची थी.