मंगलवार, 23 अक्तूबर, 2007 को 11:35 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवाददाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों में औद्योगिक शहर कानपुर में 11 लोगों को मारने के आरोप में एक अदालत ने 15 लोगों को दोषी ठहराया है.
ग़ौरतलब है कि अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को कुछ हिंदू कट्टरपंथियों ने बाबरी मस्जिद को गिरा दिया था जिसके बाद देश के अनेक इलाक़ों में सांप्रदायिक दंगे भड़क उठे थे.
उन दंगों में दो हज़ार से ज़्यादा लोग मारे गए थे. कानपुर भी सांप्रदायिक दंगों का शिकार हुआ था.
आरोप है कि कानपुर के गोविंद नगर इलाक़े में 10 दिसंबर 1992 को एक हिंदू भीड़ ने 11 मुसलमानों को ज़िंदा जला दिया था जिनमें दो महिलाएँ और एक बच्चा भी था.
अभियोजन पक्ष ने इस मुक़दमे के सिलसिले में 24 गवाह पेश किए जिनमें से दस आम लोग थे. हालाँकि सभी आम गवाह अपने बयानों से पलट गए थे लेकिन कुछ पुलिसकर्मियों ने ऐसे सबूत अदालत में पेश किए जिनमें आगज़नी, दंगों और हत्याओं के इस मामले को बल मिला.
इस मामले में कुल 25 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था लेकिन एक अभियुक्त की इस दौरान मौत हो गई.
मुक़दमे की सुनवाई और यह फ़ैसला आने में लगभग 15 साल का समय लगा है.
कानपुर के अतिरिक्त ज़िला और सत्र न्यायाधीश एसएम हसीब ने सोमवार को फ़ैसला सुनाया जिसमें 15 हिंदुओं को दोषी क़रार दिया गया है और उन पर दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में आरोप साबित हुए हैं.
जज ने नौ अभियुक्तों को बरी कर दिया है. दोषी पाए गए सभी मुजरिमों को जेल भेज दिया गया है.
इस मामले में दोषी पाए गए मुजरिमों को 24 अक्तूबर को सज़ा सुनाई जाएगी.
इस बीच अभियुक्तों के एक वकील योगेश भसीन ने कहा है कि अभियुक्तों के ख़िलाफ़ रिकॉर्ड पर कोई सबूत नहीं हैं और इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ हाई कोर्ट में अपील दायर की जाएगी.
योगेश भसीन ने एक ऐसे मामले की तरफ़ ध्यान दिलाया है जिसमें दंगों से ही संबंधित एक मुक़दमे में दो साल पहले फ़ैसला आया था और सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया गया था.