अफ़ग़ानिस्तान में एक प्रांतीय नेता ने कहा है कि राजधानी काबुल के नज़दीक एक स्थान पर नैटो के हवाई हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई और इतने ही घायल हो गए.
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता सेना ने कहा है कि वह इन दावों की जाँच-पड़ताल कगर है लेकिन उसकी सूचना के अनुसार हवाई हमलों में आम लोगों के मारे जाने की कोई ख़बर नहीं है.
काबुल में बीबीसी संवाददाता एलेस्टेयर लीथहैड का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता सेना ने हमले का निशाना बनाए गए स्थान को विद्रोहियों का ठिकाना बताया है.
वर्दाक प्रांत की परिषद के मुखिया हाजी हज़रत जनान ने कहा है कि उन्होंने जलरेज़ ज़िले में उस स्थान का दौरा किया जिसे हवाई हमलों का शिकार बनाया गया है, यह इलाक़ा काबुल प्रांत की सीमा से मिलता है और स्थानीय लोगों ने उन्हें बताया है कि मारे गए लोगों में एक ही परिवार के 11 लोग शामिल हैं.
हाजी हज़रत जनान ने कहा कि हमले में दो अन्य लोग भी मारे गए और अन्य 13 ज़ख़्मी भी हुए हैं. हाजी हज़रत जनान ने एक स्थानीय व्यक्ति से बात की जिसने उन्हें बताया कि हमले में उसकी पत्नी और बहू मारे गए हैं.
हमले के स्थान पर बहुत सा मलबा भी देखा गया है जिसमें से एक बच्चे का शव निकाला गया है.
नैटो की अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहायता सेना के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि उस इलाक़े में सोमवार को स्थानीय समय के अनुसार नौ बजे हमला किया गया लेकिन सेना के उस हमले में विद्रोहियों के एक ठिकाने को निशाना बनाया गया.
प्रवक्ता ने कहा कि इस हमले में उन्हें आम नागरिकों को मारे जाने की कोई ख़बर नहीं मिली है और घटना की जाँच की जा रही है.
अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय सेना के स्थानीय कमांडर ने कहा है कि उस हवाई हमले में 20 तालेबान मारे गए हैं और सिर्फ़ तीन आम लोग ज़ख़्मी हुए हैं.
अक्सर ऐसे हमलों में आम लोगों के मारे जाने की ख़बरें मिलती हैं लेकिन उनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना इसलिए अक्सर मुश्किल होता है क्योंकि ये इलाक़े काफ़ी दूरदराज़ में होते हैं जहाँ पहुँचना मुश्किल होता है और मारे गए लोगों को 24 घंटों के भीतर दफ़ना भी दिया जाता है.
बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इन वास्तविकताओं के बावजूद नैटो की सेनाओं के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि वे यह ध्यान रखें कि ऐसे हमलों में आम नागरिकों की मौत ना हो क्योंकि ऐसा करना उनके अभियान के लिए बहुत ज़रूरी है, ख़ासतौर से ऐसे माहौल में जब अंतरराष्ट्रीय सेना स्थानीय लोगों का दिल जीतने की कोशिश कर रहे हैं कि वे अफ़ग़ान सरकार और अंतरराष्ट्रीय सेनाओं के ख़िलाफ़ ना हो जाएँ.