सोमवार, 22 अक्तूबर, 2007 को 07:39 GMT तक के समाचार
भारत और पाकिस्तान के बीच बने साझा आतंकवाद निरोधक प्रणाली (ज्वाइंट मैकेनिज़्म अंगेस्ट टेरर) की दूसरे दौर की बातचीत सोमवार को दिल्ली में हो रही है.
बैठक के दौरान दोनों देश आतंकवादियों से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान के तौर-तरीकों पर चर्चा करेंगे.
हालाँकि इस वर्ष मार्च में इस्लामाबाद में हुई पहली बैठक में हर तीन महीने के अंतराल पर दोनो पक्षों के बीच वार्ता पर सहमति बनी थी.
लेकिन ऐसा हो नहीं पाया और सात महीने के अंतराल पर यह बैठक हो रही है.
भारत का मानना है कि बैठक में इस देरी की वजह पाकिस्तान के अंदरूनी हालात हैं, हालाँकि पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर इसकी वजह बैठक के लिए पहले नियुक्त किए गए अधिकारी का सेवानिवृत्त हो जाना बताया है.
उम्मीद
जानकारों का मानना है कि इस बैठक में पाकिस्तान आतंकवादी गुटों के बारे में जानकारी देने के मामले में अधिक सहयोग के लिए राजी हो सकता है.
पूर्व विदेश सचिव शशांक से यह पूछे जाने पर कि क्या आतंकवाद पर पाकिस्तान का रुख़ इस बार कुछ अलग होगा, उन्होंने कहा, "भारत में आम तौर पर ये धारणा है कि आतंकवाद पर पाकिस्तान का रवैया कभी रचनात्मक नहीं होगा, लेकिन इस बार पाकिस्तान में जो हालात है, उसे देखते हुए लगता है कि शायद वह सहयोग बढ़ाने के लिए राजी हो जाए."
पाकिस्तान में पिछले कुछ महीनों से ज़बर्दस्त राजनीतिक उथल-पुथल का माहौल है.
पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो की स्वदेश वापसी और कराची में उन्हें निशाना बनाकर किए गए आत्मघाती विस्फोट से पाकिस्तानी सरकार पर चरमपंथियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई का और दबाव बना है.
शशांक से यह पूछे जाने पर कि क्या इस बैठक में ठोस कार्रवाई की उम्मीद की जानी चाहिए, पूर्व विदेश सचिव ने कहा, "उम्मीद की कुछ किरण तो दिखाई देती है, लेकिन कुछ रचनात्मक होगा, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी."
तो क्या इसे नियमित द्विपक्षीय बातचीत का हिस्सा माना जाना चाहिए, शशांक ने कहा, "बातचीत ज़रूरी है. पाकिस्तान में राजनीतिक हालात बदलने पर शायद बातचीत की प्रक्रिया में कुछ बदलाव हो, लेकिन बातचीत का माहौल तो बनाए रखा जाना चाहिए."
इस साझा प्रयास में दोनों देशों के विदेश, गृह और गुप्तचर विभाग के अधिकारी शामिल हैं.
पिछले साल गुट निरपेक्ष आंदोलन के हवाना में हुए शिखर सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच इस प्रणाली के गठन पर सहमति बनी थी.