सोमवार, 22 अक्तूबर, 2007 को 14:42 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी संवादादाता, लखनऊ
उत्तर प्रदेश में दिमाग़ी बुख़ार से इस वर्ष अब तक लगभग 400 लोगों की जान जा चुकी है.
हालाँकि उत्तर प्रदेश सरकार दावा करती है कि जापानी इनसेफ़लाइटिस पर काबू पा लिया गया है लेकिन मस्तिष्क ज्वर से होने वाली मौतें लगातार जारी हैं.
उत्तर प्रदेश के 10 पूर्वी ज़िले इस बीमारी की चपेट में हैं लेकिन यह बीमारी किस वायरस के कारण फैल रही है इसका पता अभी तक नहीं चल पाया है.
तेज़ बुख़ार, बेहोशी और उसके बाद बहुत कम समय से मरीज की मौत हो जाना इस बीमारी के आम लक्षण हैं, जिनकी मौत नहीं होती उनका मस्तिष्क बुरी तरह प्रभावित हो जाता है या उनका तंत्रिकातंत्र क्षतिग्रस्त हो जाता है.
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ इस वर्ष अब तक कुल 2100 लोग दिमाग़ी बुख़ार से प्रभावित हुए जिनमें से 386 लोगों की अस्पताल में मौत हो गई.
गोरखपुर, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, देवरिया और महाराजगंज राज्य के सबके अधिक प्रभावित ज़िले हैं.
नया वायरस
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि सिर्फ़ 16 प्रतिशत मामलों में लोगों के रक्त के नमूने में जापानी इनसेफ़लाइटिस के वायरस पाए गए, लेकिन बाक़ी मामलों में लोगों को दिमाग़ी ज्वर किस कारण से हो रहा है इसका पता नहीं चल पा रहा है.
उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई प्रयोगशाला नहीं है जो वायरसों की पहचान कर सके इसलिए नमूने पुणे भेजे गए हैं ताकि बड़े पैमाने पर लोगों की मौत के लिए कौन सा वायरस ज़िम्मेदार है.
प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बाद राज्य के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव अरूण कुमार मिश्रा ने कहा है कि राज्य के स्वास्थ्य कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि वे इस रोग का इलाज कारगर तरीके से कर सकें.
स्वास्थ्य सचिव का कहना है कि जापानी इनेसेफलाइटिस का ख़तरा काफ़ी हद तक टल गया है क्योंकि लगभग एक करोड़ बच्चों को विशेष टीका लगाया गया है जो चीन से मँगाया गया था.
नए वायरस का पता चलने के बाद ही उसकी वजह से होने वाली बीमारी पर काबू पाया जा सकेगा.