सोमवार, 22 अक्तूबर, 2007 को 04:16 GMT तक के समाचार
अमरीका के साथ प्रस्तावित परमाणु क़रार पर चर्चा के लिए बनी यूपीए-वामदलों की संयुक्त समिति की सोमवार को दिल्ली में एक महत्वपूर्ण बैठक हो रही है.
वामपंथी दल अमरीका के साथ प्रस्तावित परमाणु समझौते पर आपत्ति जता रहे हैं. उनकी मांग है कि सरकार उनकी आपत्तियों पर ध्यान दे.
वामदलों का कहना है कि जिन शर्तों और सीमाओं में परमाणु क़रार हो रहा है उससे भारत के हित और संप्रभुता पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और विदेश नीति भी प्रभावित होगी.
ऐसी स्थिति में भारत के हितों से समझौता करने के बजाय इस परमाणु समझौते को फिलहाल टाल दिया जाना चाहिए.
संयुक्त समिति
वामदलों और केंद्र की यूपीए सरकार के बीच पैदा हुए इसी गतिरोध को ख़त्म करने के लिए ही पिछले दिनों एक संयुक्त समिति का गठन किया गया था ताकि परमाणु समझौते पर विस्तार से चर्चा करके एक स्पष्ट समझ बनाई जा सके.
सौदे के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पिछले दिनों हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप सम्मेलन में कहा था कि ये जीवन का अंत नहीं है लेकिन बाद में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में यह भी कहा था कि फिलहाल सौदा ठंडे बस्ते में नहीं डाला गया है.
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एबी बर्धन ने साफ कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सरकार साफ कहेगी कि सौदे को फिलहाल टाल दिया गया है.
इन बैठकों पर परमाणु क़रार ही नहीं, वर्तमान केंद्र सरकार का भविष्य भी टिका हुआ है. अगर परमाणु सौदे पर यूपीए और वाम दलों के बीच कोई सहमति नहीं बनती है तो इसका असर सरकार पर भी पड़ेगा.
इस मुद्दे पर दोनों ही पक्ष एक-दूसरे को धमकियां दे चुके हैं और सरकार गिराने की भी बात हो चुकी है.
आरोप-प्रत्यारोप और वाद-विवाद के बाद अभी भी सरकार कई तरह के बयान दे रही है और लगता है कि वो सरकार के साथ-साथ परमाणु सौदे को भी बचाने की कोशिश में लगी हुई है.