मंगलवार, 16 अक्तूबर, 2007 को 16:29 GMT तक के समाचार
संसद की विशेषाधिकार समिति ने अमरीका में भारत के राजदूत रोनेन सेन को तलब करने का फ़ैसला किया है.
राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति की बैठक बाद यह फ़ैसला किया गया है कि भारत-अमरीका असैनिक परमाणु समझौते पर भारतीय राजदूत को अपनी टिप्पणी के लिए सदन के सामने पेश होना चाहिए.
अमरीका में भारत के राजदूत ने एक इंटरव्यू में कहा था कि परमाणु समझौते का विरोध करने वाले "सिरकटी मुर्गी की तरह फड़फड़ा रहे हैं."
जहाँ एक ओर परमाणु समझौते पर अमल टलता दिख रहा है वहीं भारतीय राजदूत वामपंथी नेताओं के बारे में टिप्पणी करके मुसीबत में फँस गए दिखते हैं.
हालाँकि रोनेन सेन ने अपनी टिप्पणी के लिए माफ़ी माँग ली है और विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी संसद में इस टिप्पणी के लिए सफ़ाई दे चुके हैं लेकिन कई सदस्यों ने सेन के ख़िलाफ़ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया है.
दोनों सदनों की विशेषाधिकार समितियाँ इस मामले पर अलग-अलग विचार कर रही हैं और उन्हें तलब करने का ताज़ा फ़ैसला ऊपरी सदन राज्यसभा का है.
प्रणव मुखर्जी और रोनेन सेन ने कहा था कि उन्हें ग़लत तरीक़े से उद्धृत किया गया था और उन्होंने यह बात समझौते का विरोध करने वाले नेताओं के लिए नहीं, बल्कि कुछ पत्रकारों के लिए कही थी.
लेकिन इस सफ़ाई से वामपंथी और कुछ अन्य विपक्षी सांसद संतुष्ट नहीं हुए थे और उन्होंने विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने का फ़ैसला किया था.
राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति की बैठक के बाद एक सदस्य ने पत्रकारों को बताया कि राजदूत को तलब करने का फ़ैसला किया गया है, उन्होंने कहा कि लोकसभा की विशेषाधिकार समिति भी मामले की समीक्षा कर रही है और "दोनों सदन आपसी समन्वय से काम करेंगे."