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मंगलवार, 16 अक्तूबर, 2007 को 11:55 GMT तक के समाचार

'फ़र्ज़ी मुठभेड़' में 10 पुलिसकर्मी दोषी करार

दिल्ली की एक अदालत ने दस साल पहले कनॉट प्लेस में हुई गोलीबारी के मामले में निलंबित एसीपी सतवीर राठी समेत 10 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया है.

फ़र्जी मुठभेड़ के इन दोषी पुलिसकर्मियों को सजा 24 अक्तूबर को सुनाई जाएगी.

दोषी पुलिसकर्मियों में एसीपी सतवीर राठी के अलावा, एक इंस्पेक्टर, एक सब इंस्पेक्टर, तीन हेड कांस्टेबल और एक बैलेस्टिक विशेषज्ञ शामिल है.

बैलेस्टिक विशेषज्ञ रूप सिंह को ग़लत रिपोर्ट देने का दोषी ठहराया गया है.

मामला

31 मार्च 1997 को कनॉट प्लेस में दो व्यापारी जगजीत सिंह और प्रदीप गोयल पुलिस की गोलियों का शिकार बने थे.

सीबीआई ने इस मामले में जून 1997 में एसएस राठी और नौ अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या, हत्या का प्रयास और अन्य धाराओं के तहत आरोप पत्र दाखिल किए.

सभी अभियुक्तों को अदालत में पेश किया गया और सितंबर 1998 में अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए.

करीब साढ़े तीन साल जेल में गुजारने के बाद राठी और दूसरे अभियुक्तों को जमानत मिल गई.

आरोप पत्र के अनुसार अपराध शाखा के एसीपी राठी और अन्य 9 पुलिसकर्मियों ने उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर मोहम्मद यासीन को गिरफ़्तार करने की योजना बनाई थी.

पुलिस को पता चला कि 31 मार्च 1997 को यासीन और उसके साथी नीले रंग की मारुति एस्टीम कार में पटपड़गंज स्थित मदर डेरी के पास आने वाले हैं.

इसके बाद राठी को उनके साथी पुलिसकर्मियों से सूचना मिली कि यासीन मिंटो रोड से गुजर रहा है. तभी राठी और उनके साथियों ने कार को कनॉट प्लेस क्षेत्र में रोका और उन पर गोलियां बरसा दी.

जगजीत सिंह और प्रदीप गोयल पुलिस की गोलियों से मारे गए जो व्यापारी थे और उनकी कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी, न ही उनका यासीन से कोई लेना-देना था.