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सोमवार, 15 अक्तूबर, 2007 को 10:34 GMT तक के समाचार

सुशील झा
बीबीसी संवाददाता, लुधियाना से

जाँच और सियासत साथ-साथ

पंजाब के लुधियाना शहर में हुए बम धमाकों ने एक बार फिर राज्य में चरमपंथ की भयावह यादों को ताज़ा कर दिया है.

हालाँकि नेताओं ने ज़ोर देकर कहा है कि राज्य में आतंकवाद पनपने नहीं दिया जाएगा लेकिन इन धमाकों ने एक बार फिर राजनेताओं को एक-दूसरे पर आरोप लगाने और राजनीतिक रोटियाँ सेंकने का मौक़ा दे दिया है.

पुलिस जहाँ अभी किसी संगठन का नाम लेने से कतरा रही है वहीं विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा है.

रविवार को हुए इन धमाकों से जहाँ स्थानीय लोग सकते में हैं वही राजनेताओं ने अपनी राजनीति शुरु कर दी है.

आज दिन भर जहाँ सिनेमा हॉल में फोरेंसिक विशेषज्ञों और तरह-तरह की जाँच टीमों का तांता लगा रहा, वहीं अस्पताल में भर्ती घायलों से मिलने के लिए मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी पहुँचे.

घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा कर चुके मुख्यमंत्री बादल ने संवाददाताओं से कहा, "हम पंजाब में आतंकवाद को पनपने नहीं देंगे. जाँच चल रही है और संभव है कि इसमें चरमपंथियों का हाथ हो".

विपक्षी राजनीति

बादल के जाने के कुछ ही देर बाद घायलों से मिलने पहुँचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह केपी ने सरकार पर निशाना साधा और कहा कि जान-माल के नुक़सान के लिए राज्य सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया.

उनका कहना था, "कांग्रेस पार्टी इस घटना की घोर निंदा करती है. कांग्रेस पार्टी के शासन काल में आतंकवाद का ख़ात्मा हुआ था. ये अमन चैन कांग्रेस की दिया हुआ है जिसे बनाए रखने में मौजूदा अकाली सरकार विफल रही है. उन्हें पहले से सूचना थी ऐसी किसी वारदाता की आशंका की, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इसे रोका नहीं."

हालाँकि बादल के जाते ही अस्पताल पहुँचे आतंकवाद विरोधी मोर्चे से जुड़े नेता मनिंदर जीत सिंह बिट्टा ने कड़े शब्दों में केंद्र और राज्य सरकार दोनों को ही आड़े हाथों लिया.

गुस्से में दिख रहे बिट्टा का कहना था, "मुझे आश्चर्य नहीं है क्योंकि पिछले कुछ सालों से राज्य में आतंकवादियों को शरण मिल रही है. कुछ आतंकवादियों को जेलों से रिहा कर दिया गया. पिछले दिनों जालंधर में आरडीएक्स मिला लेकिन उसके अभियुक्त को छोड़ दिया गया. तीन महीने पहले लुधियाना में विस्फोटक पदार्थ मिला. कुछ नहीं हुआ.केंद्र सरकार और राज्य सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी रही."

बिट्टा का आरोप था कि इन धमाकों के पीछे कश्मीर और पंजाब में पहले सक्रिय रहे चरमपंथी संगठनों का हाथ है और उन्होंने जानबूझकर बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को निशाना बनाया है ताकि वो पंजाब छोड़ कर चले जाएँ.

बिट्टा ने जिन पुरानी घटनाओं का हवाला दिया उसकी पुष्टि स्थानीय पत्रकार भी करते हैं और कहते हैं कि पिछले दिनों जो विस्फोटक सामग्री लुधियाना में पकड़ी गई थी उसके बारे में जाँच साफ नहीं है.

पुलिस

हालांकि ईद और नवरात्रि को देखते हुए पुलिस ने शहर में सुरक्षा इंतज़ाम किए थे लेकिन ये इंतज़ाम मंदिर-मस्जिदों तक सीमित रह गए थे. किसी का ध्यान ऐसे सिनेमाघरों की ओर शायद गया ही नहीं जहां ग़रीब मज़दूर दो पल की खुशियां खोजने आते हैं. नतीजा छह मौतें और पैंतीस से अधिक घायल.

जांच जारी है और पुलिस ने कहा है कि वो किसी भी चरमपंथी संगठन का हाथ होने से इनकार नहीं कर रहे हैं.

राज्य के पुलिस महानिदेशक एनपीएस औलक का कहना है, "हमारी फोरेंसिक टीमें आई हैं. जाँच की गई है. एनएसजी की टीम भी आई थी. अभी कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी लेकिन हम किसी भी संगठन का हाथ होने से इनकार नहीं कर रहे हैं. ये विस्फोटक हमारे ख़्याल से इंटरवल के समय रखा गया था."

जांच चलती रहेगी और साथ ही आते रहेंगे राजनेताओं के बयान भी लेकिन कुछ घरों के कमाऊ बेटे अब कभी भी ईद और नवरात्रि मनाने अपने घर नहीं लौट सकेंगे.