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सोमवार, 15 अक्तूबर, 2007 को 14:55 GMT तक के समाचार

मानवाधिकार पर घेरे में श्रीलंका सरकार

श्रीलंका में मानवाधिकार पर सलाहकार आयोग के चार सदस्यों ने इस्तीफ़ा दे दिया है. इन सदस्यों का कहना है कि सरकार देश में हत्या, अपहरण और लोगों के लापता होने की घटनाओं पर रोक नहीं लगा पाई है.

कुछ ही दिन पहले संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार आयुक्त ने कहा था कि श्रीलंका में लोगों को सज़ा न मिलने का चलन बढ़ रहा है.

श्रीलंका की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन के पर्यवेक्षकों को वहाँ आने की अनुमति देने से मना कर दिया था.

अब मानवाधिकार पर सलाहकार आयोग के चार सदस्यों के त्यागपत्र के कारण श्रीलंका सरकार पर मानवाधिकार को लेकर दबाव और बढ़ा है. इस सलाहकार आयोग का गठन किया था मानवाधिकार मंत्री महिंदा समरसिंघे.

इस्तीफ़ा देने वाले चार सदस्यों में से एक पैकियासोथी सरवनामुट्टू ने बीबीसी को बताया कि सरकार अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उनका इस्तेमाल कर रही थी.

रिपोर्ट

उन्होंने बताया कि सरकार सिर्फ़ तमिल विद्रोहियों पर अपनी सैनिक जीत को लेकर ही उत्सुक है.

न्यूयॉर्क स्थित मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि पिछले साल जनवरी से लेकर इस साल जून तक अपहरण और लोगों के लापता होने के 11 हज़ार मामले सामने आए हैं.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हत्या के कई मामलों को अभी तक सुलझाया भी नहीं जा चुका है. हालाँकि श्रीलंका सरकार का कहना है कि ये दुष्प्रचार है और इसका मक़सद तमिल विद्रोहियों की सहायता करना है.

दूसरी ओर एलटीटीई की भी इस कारण आलोचना हुई है कि वह अपने संगठन में बच्चों को शामिल करता है.

इस बीच शनिवार को श्रीलंका के दौरे पर गए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयुक्त लुई ऑर्बर ने कहा कि सुरक्षा बलों पर पुख़्ता आरोप हैं जिनकी जाँच होनी चाहिए.

लेकिन श्रीलंका की सरकार ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार संगठन की उस मांग को अस्वीकार कर दिया है कि वहाँ निगरानी के लिए पर्यवेक्षकों को रखा जाए.

सरकार का कहना है कि इससे देश की संप्रभुता का उल्लंघन होता है.