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रविवार, 14 अक्तूबर, 2007 को 19:08 GMT तक के समाचार

पल्लवी जैन
बीबीसी संवाददाता

नाइजीरिया के अहम दौरे पर मनमोहन

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दो देशों की पाँच दिवसीय यात्रा शुरू हो गई है. इस दौरे के अंतर्गत प्रधानमंत्री रविवार को नाइजीरिया पहुँचे जिसके बाद वे दक्षिण अफ़्रीका जाएँगे.

यात्रा से पहले उन्होंने ये आशा जताई कि इस दौरे से नाइजीरिया के साथ-साथ पूरे अफ़्रीकी क्षेत्र के साथ रिश्तों में नई ताज़गी आएगी.

दक्षिण अफ्रीका में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दूसरे इस्बा सम्मेलन में भाग लेंगे जो भारत, दक्षिण अफ़्रीका और ब्राज़ील के बीच होने वाला त्रिपक्षीय सम्मेलन है.

नाइजीरिया भारत के मुख्य तेल निर्यातक देशों में से एक है और भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाता है.

कई भारतीय तेल कंपनियों ने नाइजीरिया में निवेश भी किया है. नाइजीरिया अफ़्रीका का सबसे बड़ी आबादी वाला देश है और भारत की तरह वहाँ कई धर्म, जाति, संस्कृति और समुदाय के लोग एक साथ रहते हैं.

नाइजीरिया अफ्रीकी संघ, गुटनिरपेक्ष देशों, राष्ट्रमंडल और संयुक्त राष्ट्र में महत्वपूर्ण किरदार निभाता है. इन परिस्थितियों के चलते भारत और नाइजीरिया के बीच संबंध महत्वपूर्ण है.

सामरिक हित

जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर अजय दुबे कहते हैं, "आजकल सामरिक महत्व ऊर्जा और सुरक्षा पर आ गया है और अफ़्रीकी देशों में भारत का व्यापार नाइजीरिया के साथ सबसे ज़्यादा है और नाइजीरिया के साथ भारत का 96% व्यापार ऊर्जा के क्षेत्र में है. साथ ही नाइजीरिया उस क्षेत्र का प्रभावी देश है और इसलिए उसके साथ संबंध मज़बूत करना भारत के सामरिक हित में हैं."

नाइजीरिया के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह दक्षिण अफ़्रीका जाएँगे जहाँ उनकी मुलाक़ात दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति थाबो एम्बेकी और ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला डी सिल्वा से होगी.

ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका दोनों लोकतांत्रिक देश हैं और भारत की तरह विश्व के मुख्य विकासशील देशों में इनकी गिनती होती है. ब्राज़ील दक्षिण अमरीका के, नाइजीरिया अफ़्रीका के और भारत एशिया के सबसे बड़े अर्थव्यवस्थाओं में से एक है.

जानकारों के अनुसार ये तीनों लोकतांत्रिक विकासशील देश नए अंतरराष्ट्रीय समीकरण के चलते अपने गठबंधन को और मज़बूत करना चाहते हैं.

ब्राज़ील और दक्षिण अफ़्रीका न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप के सदस्य भी हैं. अगर भारत-अमरीका परमाणु संधि लागू होती है तो भारत को परमाणु ईंधन दिलाने में इन दोनों देशों का महत्वपूर्ण योगदान हो सकता है.