रविवार, 14 अक्तूबर, 2007 को 02:23 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, राजस्थान
राजस्थान के मीणा समुदाय ने करौली ज़िले के माचगाँव में महापंचायत करके चेतावनी दी कि अगर किसी भी नए समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगें.
प्रशासन की अनुमति के बिना आयोजित किए गए इस महापंचायत में राज्य सरकार के एक मंत्री और कुछ विधायक भी शामिल हुए.
मीणा महापंचायत का कहना है कि आरक्षण के लिए अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने की गूजर समुदाय की माँग को न माना जाए.
गूजरों ने इस वर्ष के मध्य में ज़ोरदार आंदोलन छेड़कर अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता दिए जाने की माँग की थी.
राष्ट्रीय मीणा महासभा के अध्यक्ष बीएल मीणा कहते हैं, "गूजरों की माँग निराधार है, मीणा समाज के ख़िलाफ़ यह राजनीतिक षड्यंत्र है, हम इसके ख़िलाफ़ संघर्ष करेंगे, अगर सरकार ने अनुसूचित जनजाति की सूची में कोई फेरबदल किया तो पूरे देश के जनजातीय समाज को एकजुट करके हम विरोध करेंगे."
इस महापंचायत में मौजूद राजस्थान के खाद्य मंत्री किरोड़ीमल मीणा ने कहा, "मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ जब भी वक़्त आएगा आप मुझे अपने समाज के साथ खड़ा पाएँगे."
गूजर
गूजर समुदाय ने दो अक्तूबर को गांधी जयंती के दिन बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करके अपनी माँगों को एक बार फिर दोहराया था.
भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और गूजरों के नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बीच एक समझौता हुआ था जिसके तहत गूजरों ने अपना आंदोलन कुछ समय के लिए स्थगित कर दिया था.
अब गूजर समुदाय में एक बार फिर हलचल मच रही है, वे इस समझौते से ख़ुश नहीं हैं और उस पर दोबारा विचार-विमर्श करना चाहते हैं.
इसी मुद्दे पर सोमवार को गूजर महापंचायत की बैठक बुलाई गई है.
राज्य में पिछले छह महीनों से जाति महापंचायतों की होड़ सी लगी है, हर समुदाय अपने संख्याबल और एकजुटता का प्रदर्शन करके अपनी माँगे मनवाना चाहता है.