शनिवार, 13 अक्तूबर, 2007 को 12:44 GMT तक के समाचार
संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार संस्था ने श्रीलंका में मानवाधिकार की ख़राब स्थिति की निंदा करते हुए पूछा है कि सरकार इसे सुधारना भी चाहती है या नहीं.
मानवाधिकार उच्चायुक्त लुईस आर्बर ने एक बार फिर गृहयुद्ध की चपेट में आ गए श्रीलंका का दौरा करने के बाद यह बयान जारी किया है.
इस बीच श्रीलंका सरकार ने मानवाधिकार पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के उनके प्रस्ताव को ठुकरा दिया है.
मानवाधिकार पर निगरानी रखने वाली न्यूयॉर्क की संस्था 'ह्यूमनराइट्स वॉच' के अनुसार श्रीलंका में हाल ही में एक हज़ार लोगों का अपहरण हुआ है.
हालांकि सरकार का कहना है कि ये शिकायतें झूठी हैं.
विश्वास की कमी
अपने श्रीलंका दौरे के दौरान लुईस आर्बर ने मंत्रियों से और उन लोगों से मुलाक़ात की है जिनके परिजन इस बीच लापता हो गए हैं.
उन्होंने कहा, "हथियार बंद विद्रोह और आतंकवाद के ख़िलाफ़ उठाए जा रहे क़दमों के बीच लचर क़ानून व्यवस्था और दोषियों को सज़ा मिलने में कमी के मामले बहुत अधिक हैं."
उन्होंने कहा कि वर्ष 2006 में फ़्रासिसी सहायता एजेंसी के 17 कार्यकर्ताओं के मारे जाने के मामले की जाँच जो आयोग कर रहा है, उस पर लोगों का विश्वास कम है.
उच्चायुक्त ने लड़ाई के लिए बच्चों को चुनने, लोगों को ज़बरदस्ती भर्ती करने और नागरिकों को मारने के लिए तमिल विद्रोहियों की भी निंदा की है.
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निगरानी मिशन से स्थिति में सुधार आ सकता है.
लेकिन श्रीलंका सरकार ने उनके इस प्रस्ताव को ख़ारिज करते हुए कहा है कि उन्हें अपनी क्षमताएँ बढ़ाने के लिए और सहायता की ज़रुरत है.