शनिवार, 13 अक्तूबर, 2007 को 07:47 GMT तक के समाचार
बर्मा के सैन्य शासन के समर्थन में रंगून में शनिवार को एक विशाल रैली निकली है.
वहाँ सैन्य शासन के ख़िलाफ़ शुरु हुए प्रदर्शनों के बाद समर्थन में निकलने वाली यह पहली रैली है.
सैन्य शासन पर आरोप है कि उसके ख़िलाफ़ पिछले महीने शुरु हुए प्रदर्शनों को दबाने के लिए उसने हिंसा का प्रयोग किया.
यह रैली ऐसे समय में आई है जब संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी बर्मा लौटने से पहले पड़ोस के देशों से चर्चा करने जा रहे हैं.
हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता टोनी फ़्रैटो ने संयुक्त राष्ट्र के दूत से अनुरोध किया है कि वे अपनी सारी चर्चाएँ स्थगित करके बर्मा लौटें.
इस बीच बर्मा सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के उस बयान को 'खेदजनक' बताया है जिसमें इससे पहले हो रहे प्रदर्शनों को कुचलने का आरोप लगाया गया था.
रैली
शनिवार को रंगून की सड़कों पर दसियों हज़ार लोग सैन्य शासन के समर्थन में उतरे.
हल्की बारिश के बीच लोग शहर दक्षिणी हिस्से में बने खेल के मैदान में इकट्ठे हुए और उन्होंने सैन्य शासन के समर्थन में नारे लगाए.
इस रैली के लिए प्रशासन ने सुरक्षा आदि के कड़े इंतज़ाम किए थे और समाचार एजेंसियों का कहना है कि इस रैली में लोगों को लाने का इंतज़ाम भी प्रशासन की ओर से किया गया था.
ये लोग सैन्य शासन की उस योजना का समर्थन कर रहे थे जिसमें 'अनुशासित लोकतंत्र' की बात कही गई है.
इस बीच लोकतंत्र समर्थक लोग अभी भी पिछले महीने की 26-27 तारीख़ को लापता हुए लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं. इन दोनों दिनों में हज़ारों लोगों को गिरफ़्तार किया गया था.