शनिवार, 13 अक्तूबर, 2007 को 14:45 GMT तक के समाचार
बर्मा के सैन्य शासन ने लोकतंत्र समर्थक तीन बड़े नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया है.
हाल में ही में बर्मा में लोकतंत्र के समर्थन में हुए प्रदर्शनों के बाद ज़्यादातर नेताओं को पहले ही गिरफ़्तार कर लिया गया था.
गिरफ़्तार किए गए नेताओं में टे जयूवे शामिल थे जो इस साल सबसे पहले प्रदर्शन करने वालों में से थे और 1988 के आंदोलन में भी काफ़ी सक्रिय थे.
एमनेस्टी इंटरनेशनल के मुताबिक थिन थिन आए और ऑंग हटू को भी गिरफ़्तार किया गया है.
इन गिरफ़्तारियों के बाद ऐसे बेहद कम नेता ही बाहर हैं जो 1988 में भी आंदोलन में सक्रिय थे.
गिरफ़्तारियाँ
एमनेस्टी ने आशंका जताई है कि गिरफ़्तार किए गए लोगों को प्रताड़ित किया जा सकता है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल के प्रतिनिधि डेनियल एलबरमैन ने बीबीसी को बताया, गिरफ़्तार किए गए तीनों लोग इस साल हुए प्रदर्शनों में शामिल थे और बाद में वे छिप गए थे.
बर्मा में कार्यकर्ताओं का कहना है कि सितंबर के अंत के बाद से हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है.
सरकार के मुताबिक झड़पों में 10 लोग मारे गए हैं जबकि विपक्षी गुटों का कहना है कि मारे गए लोगों की संख्या कहीं ज़्यादा है.
उधर रंगून में शनिवार को हज़ारों लोगों ने सरकार के समर्थन में रैली निकाली. माना जा रहा है कि इनमें से कई लोगों ने दबाव में आकर रैली में हिस्सा लेंगे.
अधिकारियों का कहना है कि एक लाख बीस हज़ार से ज़्यादा लोगों ने रैली में हिस्सा लिया लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई है.
रिपोर्टों के मुताबिक लोगों को बसों में जबरन बैठाकर रैली में ले जाया गया और उन्हें पैसे भी दिए गए.
इस भीड़ ने पश्चिमी देशों और बीबीसी समेत विदेशी मीडिया के ख़िलाफ़ नारे लगाए.
इस बीच संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी रविवार को थाईलैंड आएँगे ताकि बर्मा में बातचीत के लिए ज़मीन तैयार कर सकें.
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने अमरीका में कहा है, मैने गम्बारी से कहा है कि वो पहले नेताओं से मिलकर माकूल राजनीतिक माहौल तैयार करें ताकि वे मध्य नवंबर से पहले बर्मा जा सकें.
इससे पहले गम्बारी बर्मा गए थे और सैन्य शासन और आंग सांग सूची से मुलाकात की थी.
संयुक्त राष्ट्र ने पिछले हफ़्ते एक बयान जारी कर सरकार विरोधी प्रदर्शनों का दमन करने के लिए हिंसा के इस्तेमाल की निंदा की है.