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शुक्रवार, 12 अक्तूबर, 2007 को 11:51 GMT तक के समाचार

सुप्रीम कोर्ट ने दिया बेनज़ीर को झटका

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप वापस लेने वाले अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिकाएँ सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली हैं.

सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि अध्यादेश के प्रावधान वैधानिक हैं या नहीं.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ सत्ता में भागीदारी को लेकर संभावित समझौते के लिए बेनज़ीर भुट्टो के पाकिस्तान वापसी की अहम शर्त भ्रष्टाचार के आरोपों को वापस लेना भी है.

हालांकि परवेज़ मुशर्रफ़ एक बार फिर राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत चुके हैं लेकिन नतीजे आधिकारिक रुप से घोषित नहीं किए गए हैं क्योंकि यह मामला भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इफ़्तिख़ार चौधरी ने कहा है कि वे माफ़ी के समझौते के मामले में दायर सभी पाँचों याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे.

इस समझौते को 'राष्ट्रीय सहमति अध्यादेश' का नाम दिया गया है.

मुख्य न्यायाधीश ने कहा है कि न्यायालय यह फ़ैसला करेगा कि इस 'अध्यादेश के प्रावधान संविधान के दायरे से बाहर तो नहीं हैं.'

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने इफ़्तिख़ार चौधरी के हवाले से कहा है, "यदि कोर्ट यह फ़ैसला करता है कि इस अध्यादेश के प्रावधान संविधान के दायरे में नहीं हैं तो इसके तहत माफ़ी पाने वाले लोग किसी भी तरह की सुरक्षा माँगने के हक़दार नहीं होंगे."

इस मामले की सुनवाई अभी तीन हफ़्ते और नहीं होनी है.

याचिकाएँ

जनरल मुशर्रफ़ और बेनज़ीर भुट्टो के बीच हुए समझौते को प्रमुख राजनीतिक क़ाज़ी हुसैन अहमद और चार अन्य लोगों ने चुनौती दी है.

पाकिस्तान के सबसे बड़े राजनीतिक दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो ने यह घोषणा कर रखी है कि वे अगले गुरुवार को पाकिस्तान वापस लौटेंगी.

राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने उन्हें यह सुझाव दिया है कि उन्हें वापस लौटने के लिए राष्ट्रपति चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले का इंतज़ार करना चाहिए.

हालांकि बेनज़ीर भुट्टो ने अपनी वापसी की तारीख़ बदलने से इनकार कर दिया है. बेनज़ीर भुट्टो और परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच लंबी चर्चाओं के बाद यह समझौता हुआ है.