गुरुवार, 11 अक्तूबर, 2007 को 10:27 GMT तक के समाचार
हारून रशीद
बीबीसी संवाददाता, वज़ीरिस्तान से
अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे दक्षिणी वज़ीरिस्तान में स्थानीय तालेबान चरमपंथियों ने पिछले चालीस दिनों से ढाई सौ से अधिक सैनिकों को बंधक बना रखा है और वे उम्मीद कर रहे हैं कि पाकिस्तानी सेना उनकी रिहाई के लिए बातचीत शुरू करेगी या ताक़त का इस्तेमाल करेगी.
तीस अगस्त को दक्षिणी वज़ीरिस्तान के महसूद इलाक़े में काफ़िले में शामिल इन तीन सौ फ़ौजियों में से तीन ने बीबीसी उर्दू से एक विशेष बातचीत में कि उन्हें अच्छी तरह रखा गया है लेकिन उनका कहना है कि 'क़ैद तो क़ैद होती है.'
तालेबान की अनुमति से इन अपहृत क़ैदियों से एक पहाड़ी के ऊपर मुलाक़ात की लेकिन तालेबान ने उन्हें नहीं बताया कि वह कौन सी जगह है.
पाकिस्तानी सेना के जिन अधिकारियों से बीबीसी की बातचीत हुई उनके नाम हैं लेफ्टिनेंट कर्नल ज़फ़र, मेजर अतीक आज़म और लेफ़्टिनेंट फ़ारूक़ मंसूर.
यह पहला मौक़ा था जब बंधक बनाए गए सैनिकों की किसी पत्रकार से बातचीत हुई है. तालेबान ने इन सैनिकों को अलग-अलग टुकड़ियों में बाँटकर रखा है.
इन लोगों को एक क़िलेनुमा मकान में रखा गया है. ये तीनों सैनिक अधिकारी बातचीत के लिए तैयार नहीं थे लेकिन अपने अपहर्ताओं के दबाव डालने पर वे बोलने को तैयार हुए, लेकिन वे बहुत कम बोल रहे थे.
कर्नल ज़फ़र का कहना था कि वे रसद लेकर जा रहे थे तभी तालेबान ने उन्हें बंधक बना लिया, वे उस इलाक़े में किसी ऑपरेशन के लिए नहीं गए थे.
मेजर अतीक आज़म ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पाकिस्तानी सेना उनकी रिहाई के अलग-अलग विकल्पों पर विचारों कर रही है जिनमें बातचीत के अलावा एक्शन भी शामिल हो सकता है.
वे कहते हैं, "इतनी बड़ी फ़ोर्स को वे भुला नहीं सकते, फौज कुछ न कुछ सोच ज़रूर रही होगी."
तालेबान
तालेबान ने इन लोगों की फ़ौजी वर्दी उतरवाकर स्थानीय पोशाक पहना दी है. बंधक बनाए गए फ़ौजियों में से 31 रिहा किए जा चुके हैं जबकि तीन लोगों को तालेबान ने मार डाला है.
तालेबान के प्रवक्ता का कहना है कि इन फ़ौजियों की रिहाई के लिए होने वाली बातचीत के दौरान माहौल बेहतर बनाने के लिए उन्होंने 31 लोगों को रिहा कर दिया था लेकिन उनका आरोप है कि सरकार गंभीर नहीं है, पूरा मामला सरकार के रुख़ पर निर्भर है.
तालेबान की माँग है कि इन लोगों बदले उनके तीस गिरफ़्तार साथियों को रिहा किया जाए.
पहले इन अधिकारियों को तालेबान ने फ़ोन पर अपने अपने घर बात करने की अनुमति दी थी लेकिन बाद के दिनों में उसे बंद कर दिया गया.
तीनों सैनिक अधिकारियों का कहना है कि क़बायली परंपरा के अनुरूप उनके साथ अच्छा सुलूक किया जा रहा है.