बुधवार, 10 अक्तूबर, 2007 को 12:27 GMT तक के समाचार
दुनिया भर में मानव तस्करी को रोकने के प्रयासों के तहत संयुक्त राष्ट्र का एक विशेष अभियान बुधवार को नई दिल्ली में शुरू किया जा रहा है और इसका उद्देश्य नए लक्ष्य हासिल करना है.
नशीली दवाओं और अपराध पर काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र के विशेष कार्यालय का अनुमान है कि दुनिया भर में लाखों लोगों को मानव तस्करी का शिकार बनाकर उन्हें यौन व्यापार और बंधुआ मज़दूरी में झोक दिया जाता है और उनमें बहुत से बच्चे भी होते हैं.
इस कार्यालय का कहना है कि मानव तस्करी से चलने वाले इन क्षेत्रों के ज़रिए हर साल लगभग 32 अरब डॉलर का कारोबार होता है.
मानव तस्करी का सबसे ज़्यादा चलन दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में होता है और उसके बाद दक्षिण एशिया के देशों में यह समस्या काफ़ी गंभीर है.
दक्षिण एशिया के देशों में हर रोज़ बच्चों और युवा महिलाओं को काम या नौकरी, शादी या फिर फ़िल्म जगत में अच्छी जगह दिलाने के बहाने घर से बहला-फुसलाकर निकाल लिया जाता है.
उन्हें इन स्थानों में तो कोई कामकाज या जगह तो नहीं मिलती मगर उन्हें या तो यौन शोषण की दुनिया में धकेल दिया जाता या फिर वे बंधुआ मज़दूरी के लिए विवश होते हैं.
भारत में मानव तस्करी ने काफ़ी संगठित रूप ले रखा है और बहुत से ऐसे गिरोह सक्रिय हैं जो महिलाओं और बच्चों की तस्करी करके उन्हें देश के भीतर और बाहर भेजते हैं. बहुत से गिरोह नेपाल और बांग्लादेश से भी लड़कियों और लड़कों की तस्करी करते हैं.
ये तथ्य नशीली दवाओं और अपराधों पर काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र के विशेष दफ़्तर ने उजाकर किए हैं. यही दफ़्तर मानव तस्करी के ख़िलाफ़ एक बड़ा अभियान शुरू कर रहा है.
इस अभियान में सरकारी अधिकारी, क़ानून लागू करने वाली एजेंसियाँ, उद्योग जगत की बड़ी हस्तियों, मीडिया और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर एकजुट कोशिश की जा रही है.
बीबीसी संवाददाता संजय मजूमदर का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य और आशा ये है कि समचुत धन इकट्ठा किया जाए जिससे मानव तस्करी के ख़िलाफ़ संघर्ष में नई कामयाबी हासिल की जा सके.
नई दिल्ली में दो दिन चलने वाले इस सम्मेलन से उम्मीद की जा रही है कि मानव तस्करी के ख़िलाफ़ संघर्ष की कोई सटीक रूपरेखा तैयार की जाएगी और अगले पाँच साल में हासिल किए जाने वाले लक्ष्य भी निर्धारित किए जाएंगे.