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बुधवार, 10 अक्तूबर, 2007 को 13:29 GMT तक के समाचार

अमरनाथ तिवारी
पटना से

'कोई मेरे आकाश को लौटा दे'

जब भी फ़ोन की या दरवाज़े की घंटी बजती है तो पटना में पांडे परिवार के सदस्य बेचैन हो जाते हैं.

उन्हें उम्मीद है कि कभी न कभी कोई उनके इकलौते बेटे आकाश के बारे में कोई अच्छी ख़बर ले कर आएगा. 14 साल के आकाश का दो महीने पहले अपहरण हो गया था.

दस अगस्त को स्कूल जाते समय आकाश को कुछ लोगों ने अगवा कर लिया था.

बिहार में अकसर अपहरणकर्ता रईस लोगों को निशाना बनाते हैं लेकिन अब तक यह नहीं पता चल पाया कि एक मध्यमवर्गीय परिवरा के बेटे आकाश का अपहरण क्यों किया गया.

आकाश के पिता योगेंद्र पांडे को अपने मोबाइल पर आया एक फ़ोन याद है कि उनके बेटे को कुछ लोगों ने उठा लिया है और उसकी साइकिल और स्कूल बैग सड़क पर पड़े हैं.

उसके बाद से फिरौती की कोई मांग नहीं आई है और आकाश के परिवार को कोई अंदाज़ा नहीं है कि
उनके बच्चे को क्यों ले जाया गया.

पांडे परिवार अपने बेटे की सलामती के लिए 30 से ज़्यादा धार्मिक स्थलों पर जा कर प्रार्थना कर चुका है. वे ज्योतिषियों, जादू-टोना जानने वालों और तांत्रिकों, सभी के पास जा चुके हैं.

आँसू सूख गए हैं

वे बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार से दो बार मिले और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मिल कर अपने बेटे को वापस लाने की गुहार कर चुके हैं.

पचास हज़ार रुपये से ज़्यादा की रक़म ख़र्च करने के बावजूद परिवार की कोशिशें रंग नहीं लाई हैं और वह पूरी तरह टूट चुका है.

आकाश के पिता एक सरकारी दफ़्तर में लैबोरेट्री असिस्टेंट के तौर पर काम करते हैं और बस इतना ही कमा पाते हैं बमुश्किल अपने पाँच सदस्यीय परिवार का पेट भर सकें.

वह कहते हैं, "मैं भारी क़र्ज़ में डूब गया हूँ लेकिन एक बार आकाश घर आ जाए तो मैं दफ़्तर से ऋण ले कर इसे चुका दूँगा".

"मेरे आँसू सूख गए हैं. मैं पूरी तरह टूट चुका हूँ. मुझे समझ में नहीं आता कहाँ जाऊँ, किसका दरवाज़ा खटखटाऊँ".

उनकी पत्नी अंजु और बेटियाँ आकांक्षा और अंकिता अपने आँसू नहीं रोक पातीं.

अंजु कहती हैं, "एक-एक सेकेंट घंटे की तरह लगता है. हम सिवाय रोने और प्रार्थना करने के कुछ कर भी तो नहीं सकते. काश अपहरणकर्ता मुझे मेरा बेटा लौटा दे".

वह जिससे मिलती हैं यही कहती हैं, "अगर वह आपको कहीं नज़र आए तो कहिएगा मैं उसकी पसंद का खाना बनाया है".

आकाश की बहनों ने इस घटना के बाद स्कूल जाना बंद कर दिया है.

आकांक्षा कहती है, "जब हमारा भाई लौटेगा तो हम साथ ही पढ़ाई शुरू करेंगे".

पांडे परिवार का पूरा जीवन अब टेलीफ़ोन और अख़बारों के इर्दगिर्द घूमता है कि शायद आकाश की कोई ख़बर मिल जाए.

योगेंद्र पांडे को यह समझ में नहीं आता कि उनकी जैसी कम आय वाले सरकारी कर्मचारी के बेटे का क्यों अपहरण कर लिया गया.

वह कहते हैं, मैं तो फिरौती में दस हज़ार रुपये भी नहीं दे सकता. उसे ज़रूर किसी और के धोखे में उठा लिया गया है.

पुलिस ने लगता है इस मामले से हाथ झाड़ लिया है. बिहार के पुलिस प्रमुख आशीष रंजन झा का कहना है, "हमें इस मामले में कोई सुराग़ नहीं मिला है".

बिहार को भारत की अपहरण राजधानी कहा जाता है. एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार इस साल पटना में ही अब तक 15 स्कूली बच्चों का अपहरण हो चुका है.

उच्च न्यायालय में पेश की गई एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में पिछले छह महीने में 2, 217 लोगों का अपहरण हुआ है.

पांडे परिवार कब तक आकाश के आने की आस लगाए रखेगा?

योगेंद्र पांडे कहते हैं, "हम आशा नहीं छोड़ेंगे. आँसू बहाते रहेंगे और प्रार्थना करते रहेंगे. किसी मृत बंधक की तो कोई क़ीमत नहीं है न. तो वह ज़रूर जीवित होगा".