सोमवार, 08 अक्तूबर, 2007 को 20:44 GMT तक के समाचार
अमरीका के साथ भारत के परमाणु समझौते पर वामदलों के तेवर नरम होते नज़र नहीं आ रहे और सरकार की बीच का रास्ता निकालने की तमाम कोशिशें बेकार साबित हो रही हैं.
सोमवार को दो प्रमुख वामदलों, सीपीआई और सीपीएम के महासचिवों की ओर से जारी किए गए एक संयुक्त बयान में वामदलों ने दोहराया है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौता भारत के हितों के ख़िलाफ़ है.
वामदलों की ओर से ताज़ा बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी (आईएईए) के अध्यक्ष मोहम्मद अल बरदेई मंगलवार को भारत आ रहे हैं.
वामदलों ने अपने संयुक्त बयान में कहा है कि जो परमाणु समझौते की वकालत कर रहे हैं उन्हें यह बात मालूम होनी चाहिए कि भारत अपने बलबूते पर भी परमाणु ऊर्जा का विकास कर पाने में सक्षम है.
वामदलों ने कहा कि अमरीका के साथ समझौते में भारत की संप्रभुता और हितों का समर्पण करने की कोई ज़रूरत नहीं है.
कोशिशें तेज़
हालांकि सोमवार को वामदलों और यूपीए के बीच बातचीत और मान-मनव्वल के कई दौर देखने को मिले.
सोमवार को विदेशमंत्री प्रणव मुखर्जी ने वाम नेता प्रकाश करात और सीताराम येचुरी से मुलाक़ात की. बताया जा रहा है कि विदेश मंत्री ने परमाणु मसले पर पैदा गतिरोध को ख़त्म करने के लिए एक फ़ार्मूला भी वामदलों के सामने रखा.
इसके बाद वामनेताओं ने यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की. इस बैठक के बाद कांग्रेस कोर समिति की भी एक बैठक सोमवार को हुई.
मंगलवार को परमाणु समझौते पर आगे की बातचीत के लिए यूपीए और वामदलों के बीच दोबारा बातचीत होनी है.
उधर मंगलवार को अल बरदेई भारत पहुँचने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं से बातचीत करने वाले हैं.
हालांकि बातचीत के इन दौर को औपचारिक ही बताया जा रहा है पर वामदलों ने परमाणु समझौते को लेकर अपना रुख़ एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वे सैद्धांतिक रूप से इस समझौते के ख़िलाफ़ हैं और जिन शर्तों पर समझौता हो रहा है वे कतई स्वीकार्य नहीं हैं.
इससे पहले रविवार को कांग्रेस अध्यक्ष ने एक जनसभा में कहा था कि परमाणु समझौते का विरोध करने वाले विकास के विरोधी हैं.
इसपर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए वामदलों ने कहा था कि यूपीए सरकार अमरीका के दबाव में काम कर रही है.