शुक्रवार, 05 अक्तूबर, 2007 को 14:04 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान में अधिकारियों ने कहा है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने उस 'सुलह-सफ़ाई अध्यादेश' पर हस्ताक्षर कर दिए हैं जिसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो के साथ सत्ता बँटवारा समझौते का रास्ता साफ़ हो जाएगा.
समाचार एजेंसी एएफ़पी ने कहा है कि इस अध्यादेश में उन राजनीतिज्ञों को आम माफ़ी देने की बात कही गई है जो 1988 से 1999 के बीच देश की राजनीति में सक्रिय थे. इससे पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो का देश की राजनीति में फिर से आने का रास्ता साफ़ हो जाएगा.
ग़ौरतलब है कि बेनज़ीर भुट्टो पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए हैं जिनकी वजह से उन्हें देश से बाहर जाना पड़ा था और क़रीब आठ साल से वह देश से बाहर हैं.
राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के एक निकट समझे जाने वाले नेता और रेल मंत्री शेख़ रशीद अहमद ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने अध्यादेश पर दस्तख़त कर दिए हैं. यह एक नए दौर की शुरूआत है."
प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ ने एक वक्तव्य जारी करके कहा है कि राष्ट्रीय सुलह-सफ़ाई समझौते से पाकिस्तान के काफ़ी समय से चले आ रहे राजनीतिक संकट के माहौल में कुछ सदभाव बनेगा.
इस सुलह-सफ़ाई समझौते को पहले संघीय मंत्रिमंडल ने शुक्रवार को सुबह मंज़ूरी दी थी जिस पर बाद में राष्ट्रपति ने भी हस्ताक्षर कर दिए.
शौक़त अज़ीज़ ने कहा, "राष्ट्रीय राजनीति में समन्वय, सदभाव और सहिष्णुता का माहौल तैयार करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण क़दम है, यह माहौल बदले की भावना और ध्रुवीकरण से मुक्त होगा जैसा कि 1980 से 1990 के दशक में देश में राजनीतिक हालात बन गए थे."
ग़ौरतलब है कि बेनज़ीर भुट्टो ने 18 अक्तूबर को पाकिस्तान वापस आने का ऐलान किया है और इस राष्ट्रीय सुलह-सफ़ाई समझौते से उनका वतन वापसी का रास्ता साफ़ हो जाएगा. फिलहाल बेनज़ीर भुट्टो भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रही हैं.
बेनज़ीर भुट्टो ने वर्ष 2008 के आरंभ में होने वाले आम चुनावों में अपनी पीपुल्स पार्टी का नेतृत्व करने का आहवान किया है. इस समझौते के बाद परवेज़ मुशर्रफ़ पर दबाव काफ़ी कम हुआ है जो राष्ट्रपति पद के लिए पाँच साल के दूसरे कार्यकाल के लिए उम्मीदवार हैं लेकिन उन्होंने सेनाध्यक्ष का पद भी नहीं छोड़ा है.
राष्ट्रपति पद के दो अन्य उम्मीदवारों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके दलील दी है कि परवेज़ मुशर्रफ़ राष्ट्रपति और सेनाध्यक्ष साथ-साथ रहते हुए चुनाव नहीं लड़ सकते.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि शनिवार के चुनाव तो पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही हो सकते हैं मगर उनके परिणाम तब तक घोषित नहीं किए जाएंगे जब तक इस मामले का फ़ैसला नहीं हो जाता.