शुक्रवार, 05 अक्तूबर, 2007 को 22:21 GMT तक के समाचार
बर्मा की ताज़ा स्थिति पर चिंता जताते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने कहा है कि इस बात की संभावना कम ही नज़र आती है कि बर्मा में हालात सुधरेंगे.
बर्मा के हालात का जायज़ा लेकर लौटे विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी ने बताया कि सुरक्षा परिषद को लगता है कि बर्मा फिलहाल अपनी सामान्य स्थिति में वापस लौटने की हालत में नहीं है.
गम्बारी ने शुक्रवार को सुरक्षा परिषद के सामने बर्मा के बारे में अपने अनुभव भी रखे और इसके बाद सुरक्षा परिषद की राय से अवगत कराया.
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बातचीत करते हुए उन्होंने मनमाने ढंग से हो रही गिरफ्तारियों पर गहरी चिंता व्यक्त की.
उन्होंने कहा कि सैनिक शासन की ओर से उन्हें बताया गया था कि हिरासत में लिए गए 2000 से भी ज़्यादा लोगों को रिहा किया जा चुका है पर गिरफ़्तारियों का सिलसिला थमा नहीं है.
गम्बारी ने अपने वक्तव्य में बर्मा के सैनिक शासन के नेताओं से कहा है कि वे बर्मा में शासन की ओर से हो रही हत्याओं पर तुरंत रोक लगाए, गिरफ्तार किए गए राजनीतिक क़ैदियों को रिहा करें और विपक्ष के साथ संवाद स्थापित करें.
इससे पहले गुरुवार को गम्बारी संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून से मिले और उन्हें बर्मा की ताज़ा स्थिति से अवगत कराया.
गम्बारी इसी वर्ष नवंबर महीने के बीच में दोबारा बर्मा जाने वाले हैं पर उन्होंने कहा है कि शायद वो तय समय से पहले ही वहाँ जाएं.
शासन का पैतरा
इससे पहले गुरुवार को बर्मा के सरकारी टेलीविज़न ने बताया था कि सैनिक शासक, जनरल थान श्वे सिद्धांत रूप से लोकतंत्र समर्थक नेता सू ची से मिलने को तैयार हो गए हैं.
हालांकि इसके लिए सू ची के सामने शर्त रखी गई थी कि वो बर्मा के ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंधों को जारी अपना समर्थन वापस लें.
पिछले 15 वर्षों के दौरान यह पहला मौका था जब सैनिक शासक ने लोकतंत्र समर्थक सू ची से मिलने की मंशा जताई.
ग़ौरतलब है कि सैनिक शासन वाले बर्मा में पिछले कुछ दिनों से सैन्य शासन के ख़िलाफ़ लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं.
इन प्रदर्शनों और अभियानों को दबाने के लिए हुए बल प्रयोग और हिंसा में लगभग दर्जन भर लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोगों को जेलों में डाल दिया गया है.