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शुक्रवार, 05 अक्तूबर, 2007 को 00:49 GMT तक के समाचार

'सत्ता में साझेदारी का अंतिम मसौदा तैयार'

बेनज़ीर भुट्टो और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के बीच सत्ता में साझीदारी पर एक समझौते के अंतिम मसौदे को तैयार कर लिया गया है.

पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की शीर्ष नेता बेनज़ीर भुट्टो के सुरक्षा सलाहकार रहमान मलिक ने बीबीसी को बताया कि 41 घंटे की कोशिशों के बाद समझौते के अंतिम मसौदे को तैयार कर लिया गया है.

उन्होंने बताया कि इसे तैयार करने के लिए पाकिस्तान सरकार और उनकी ओर से मसौदों का आदान-प्रदान होता रहा जिसमें बदलावों के बाद एक अंतिम लिखित मसौदा बन गया है.

होठों तक आ गया है प्याला

उन्होंने कहा, "हमारे बीच एक लिखित समझौता तैयार हो गया है और आशा करता हूँ कि शुक्रवार तक इस बारे में एक अध्यादेश जारी हो जाएगा. इसके बाद हम कह सकेंगे कि हमारे और पाकिस्तान की सरकार के बीच समझौता हो गया है."

विरोध

इसके तहत पीपीपी नेता बेनज़ीर भुट्टो के ख़िलाफ़ दस साल पुराने मामलों को हटा लिया जाएगा और तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर लगी रोक भी हटा ली जाएगी.

रहमान मलिक का कहना था, "इस अध्यादेश का फ़ायदा नवाज़ शरीफ़, उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ और मुत्ताहेदा क़ौमी मूवमेंट के नेताओं को भी मिलेगा. हम हरगिज नहीं चाहते थे कि इसे सिर्फ़ अपने लिए इस्तेमाल करें."

दूसरी ओर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता और निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के भाई शाहबाज़ शरीफ़ ने इसे राजनीतिक सौदा करार दिया है.

उनका कहना था, "ये सिर्फ़ भुट्टो और मुशर्रफ़ के बीच सौदेबाजी है. किसने मुशर्रफ़ को ये अधिकार दिया है कि नेताओं और अधिकारियों पर लगे पुराने मामलों को वापस ले लिया जाए."

जब उनसे पूछा गया कि क्या तीसरी बार राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ने या भ्रष्टाचार के लंबित मामलों को लेकर भी समझौते में कुछ शर्ते रखी गई हैं तो उन्होंने कहा कि अभी पूरा समझौता एक मसौदे की शक्ल में हैं और मसौदे की बारीकियों पर बातचीत करना अभी जल्दबाज़ी होगा.

दरअसल, इस बारे में अध्यादेश जारी होने के बाद ही समझौता निर्णायक माना जा सकता है.

पिछले कई महीनों से बेनज़ीर भुट्टो और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के बीच सत्ता की साझेदारी की बातचीत चल रही थी और अब लगता है कि उसका रास्ता साफ़ होता जा रहा है.

इससे पहले बेनज़ीर भुट्टो ने लंदन में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि जनरल मुशर्रफ़ ने राष्ट्रीय सहयोग और समन्वय की बात कही है और उनकी पार्टी भी चाहती है कि अतीत को पीछे छोड़कर "देश भविष्य की ओर क़दम बढ़ाए."