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गुरुवार, 04 अक्तूबर, 2007 को 15:49 GMT तक के समाचार

नेपाल बातचीत में कोई सहमति नहीं

नेपाल में अंतरिम सरकार और माओवादियों के बीच नवंबर में प्रस्तावित संविधान सभा चुनावों के बारे में कोई समझौता नहीं हो सका है, अलबत्ता दोनों पक्ष मौजूदा राजनीतिक संकट को हल करने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमत हो गए हैं.

माओवादियों की माँग है कि राजा संस्था को राजनीतिक व्यवस्था से तुरंत समाप्त किया जाए और अपनी इसी माँग के साथ वे सितंबर 2007 में अंतरिम सरकार से बाहर हो गए थे.

22 नवंबर को संविधान सभा के चुनाव होने हैं. माओवादी लगभग एक दशक पुराने गृह युद्ध को समाप्त करके 2006 में सरकार में इसी शर्त पर शामिल हुए थे कि एक संविधान सभा का गठन किया जाएगा और वह चुनाव के ज़रिए होगा.

अंतरिम सरकार और माओवादियों के बीच गुरूवार को शुरू हुई बातचीत को मौजूदा राजनीतिक संकट दूर करने का आख़िरी प्रयास समझा जा रहा था. चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को संविधान सभा के चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम देने लिए शुक्रवार तक का समय दिया है.

गुरूवार की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने कहा है कि हालाँकि बातचीत में कोई सहमति नहीं बन पाई लेकिन बातचीत शुक्रवार को सुबह फिर से शुरू करने पर राज़ीनामा हुआ है.

माओवादियों के प्रवक्ता कृष्ण बहादुर महारा ने गुरूवार की बातचीत समाप्त होने के बाद पत्रकारों से कहा, "चूँकि हमारी माँगों पर कोई सहमति नहीं हुई इसलिए हमने प्रस्ताव रखा है कि जब तक संसद के विशेष सत्र के ज़रिए गतिरोध को दूर नहीं कर लिया जाता है, तब तक चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया जाए."

महारा ने कहा कि माओवादियों की माँग है कि चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाख़िल करने की समय सीमा बढ़ा दी जाए और मतदान अपने निर्धारित समय पर ही हो.

गतिरोध जारी

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल के एक वरिष्ठ नेता झल नाथ खणाल का कहना था कि चूँकि मुख्य धारा के राजनीतिक दल इस माँग पर सहमत नहीं हुए जिसके बाद दोनों पक्ष बातचीत शुक्रवार को भी जारी रखने पर सहमत हुए, "कोई समझौता नहीं हो सका. हम चुनाव समय पर चाहते हैं."

माओवादी 22 नवंबर को चुनाव होने से पहले राजा संस्था को समाप्त करने के अलावा इस माँग पर भी ज़ोर दे रहे हैं कि चनाव पूरी तरह से आनुपातिक प्रतिनिधित्व के अनुसार हो लेकिन प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला की सरकार इसका विरोध कर रही है.

माओवादियों ने कहा है कि अगर सरकार उनकी बात नहीं मानती तो वे सड़कों पर प्रदर्शन करके चुनाव प्रक्रिया को बाधित करेंगे. माओवादियों ने आहवान किया है कि उनकी माँगों पर विचार करने के लिए अगले सप्ताह संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए.

राजनीतिक विश्लेषक तो गुरूवार की बातचीत शुरू होने से पहले ही कह चुके थे कि राजनीतिक संकट का कोई समाधान निकलने की बहुत कम संभावना है.

नेपाल में वरिष्ठ पत्रकार और समय समाचार पत्रिकार के संपादक युवराज घिमिरे का कहना है, "नवंबर में चुनाव होने की कम ही संभावना नज़र आती है क्योंकि आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं होने की स्थिति में माओवादी चुनाव प्रक्रिया का बहिष्कार करने पर तुले हुए हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन यह माँग स्वीकार नहीं कर रहा है."