मंगलवार, 02 अक्तूबर, 2007 को 02:04 GMT तक के समाचार
भारत ने बर्मा के साथ बातचीत कर मसला सुलझाने की वकालत करते हुए कहा है कि वह बर्मा पर किसी भी तरह के आर्थिक प्रतिबंध के ख़िलाफ़ है.
भारतीय विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत पड़ोसी देश बर्मा में भूमिका निभाने के लिए तैयार है.
इससे पहले चीन ने बर्मा के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का विरोध करते हुए बातचीत से मसला सुलझाने की हिमायत की थी.
अमरीका ने बर्मा के सैन्य शासन के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध लगाने का सुझाव दिया था.
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ दिनों से बर्मा के सैन्य शासन के ख़िलाफ़ लोकतंत्र के समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं और इसे दबाने के लिए हुई हिंसा में एक जापानी पत्रकार सहित कम से कम नौ लोग मारे गए हैं.
'प्रतिबंध नहीं'
विदेश मंत्री मुखर्जी ने कहा है कि भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आर्थिक प्रतिबंध के ख़िलाफ़ है.
उनका कहना था कि आर्थिक प्रतिबंध को आख़िरी हथियार के रुप में उपयोग में लाया जाना चाहिए.
प्रणब मुखर्जी का कहना था, "कई बार आर्थिक प्रतिबंधों का कोई असर नहीं होता उल्टे इसका विपरीत असर दिखाई पड़ता है और लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं."
प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि भारत बर्मा के शासकों के साथ बातचीत करने का पक्षधर है.
बर्मा में लोकतंत्र समर्थकों के आंदोलन और हिंसा की घटनाओं के बाद भारत ने पहली बार इतना खुला बयान दिया है और अपनी नीति स्पष्ट करने की कोशिश की है.
इससे पहले प्रणव मुखर्जी ने बर्मा के विदेश मंत्री से भी मुलाक़ात की थी.