मंगलवार, 02 अक्तूबर, 2007 को 09:44 GMT तक के समाचार
नारायण बारेठ
बीबीसी संवाददाता, जयपुर
राजस्थान में गूजर समुदाय के सदस्य अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर राज्य में कई स्थानों पर गिरफ्तारियां दे रहे हैं.
गूजर नेता सचिन पायलट गिरफ़्तारी देने के लिए जयपुर के मुहाना क्षेत्र में हैं जबकि किरोड़ी सिंह बैंसला गिरफ़्तार होने के लिए भरतपुर पहुंचे हैं.
गूजरों का कहना है कि इस बार वो शांतिपूर्व तरीक़े से अपनी मांगों के समर्थन में गिरफ़्तारियां दे रहे है.
राज्य सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं और जगह-जगह खुली जेल बनाकर गिरफ़्तार किए गए लोगों को रखने का इंतज़ाम किया है.
उल्लेखनीय है कि राजस्थान में 29 मई से 4 जून के बीच हुईं हिंसा में 25 लोग मारे गए थे.
गिरफ़्तारी और इंतज़ाम
गूजर नेताओं ने दावा किया है कि राज्य भर मे चार से पाँच लाख लोग गिरफ़्तारियाँ देंगे.
उधर प्रशासन का कहना है कि उन्होंने डेढ़ लाख लोगों को गिरफ़्तार करके रखने का इंतज़ाम किया है.
सुबह से हज़ारों की संख्या में गूजर समुदाय के लोग इन स्थानों पर इकट्ठे हो चुके हैं और जैसे-जैसे वरिष्ठ नेता आ रहे हैं वैसे-वैसे गिरफ़्तारियां दी जा रही हैं.
प्रशासन ने सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की तीस कंपनियाँ तैनात की हैं जो राज्य पुलिस की तैनाती के अतिरिक्त है.
गिरफ़्तार किए गए लोगों को ढोने के लिए राज्य परिवहन की 1100 बसों और बड़ी संख्या में निजी कंपनियों की बसों का इंतज़ाम किया गया है. गिरफ़्तार किए गए लोगों के लिए खाने आदि का भी इंतज़ाम किया गया है.
गूजर समुदाय के इस आंदोलन के चलते कई शहरों में दूध की कमी हो गई है. जयपुर शहर में ही 25 हज़ार लीटर दूध की कमी की रिपोर्ट है.
माँग
ग़ौरतलब है कि राजस्थान में गूजरों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में रखा गया है लेकिन वे अनुसूचित जनजाति में शामिल होने के बाद मिलने वाली आरक्षण सुविधा की मांग कर रहे हैं.
तेरह सितंबर को हुई गूजर महापंचायत में सरकार को दो अक्तूबर तक का समय दिया गया था और साथ में अल्टीमेटम दे दिया गया था कि अगर तब तक सरकार कोई फ़ैसला नहीं करती है तो वे गिरफ़्तारियाँ देंगे.
इससे पहले जून में इस मांग को लेकर गूजर समुदाय सड़कों पर उतर आया था और उनके आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया था.
इस आंदोलन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों समेत 25 लोगों की जानें गई थीं.
राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में भी गूजर समाज के लोग इस आंदोलन से जुड़ गए थे.
इस दौरान हुए धरने-प्रदर्शनों के कारण सामान्य जनजीवन ख़ासा प्रभावित हुआ था.