शनिवार, 29 सितंबर, 2007 को 23:34 GMT तक के समाचार
ईरान और पाकिस्तान ने भारत के बिना ही गैस पाइपलाइन का समझौता कर लिया है. दोनों देश अक्तूबर के अंत में इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.
गैस पाइप लाइन के लिए 24 सितंबर से शुरु हुई बैठक शनिवार को समझौते को अंतिम रुप देने के साथ ख़त्म हुई.
इस बैठक में भारत ने यह कहकर हिस्सा नहीं लिया था कि पाकिस्तान के साथ ट्रांज़िट फ़ीस का मामला सुलझाने के बाद ही वह इस बैठक में हिस्सा लेगा.
हालांकि ईरान के पेट्रोलियम मंत्रालय के विशेष प्रतिनिधि होजातुल्ला ग़ानिमीफ़र्द ने कहा है कि भारत जब भी अपनी समस्या सुलझाकर इस समझौते में शामिल होना चाहेगा तो उसका स्वागत होगा और तब यह समझौता त्रिपक्षीय हो जाएगा.
उल्लेखनीय है कि ईरान, पाकिस्तान और भारत गैस पाइपलाइन परियोजना पर चर्चा कर रहे थे और इस पर सैद्धांतिक रुप से सहमति भी बन चुकी थी.
विशेषज्ञों का कहना है कि अमरीका नहीं चाहता कि भारत और पाकिस्तान ईरान के साथ गैस पाइपलाइन के लिए समझौता करें.
ईरान-पाकिस्तान के बीच हुए समझौते पर अभी भारत सरकार की प्रतिक्रिया अभी नहीं मिल सकी है.
ईरान-पाकिस्तान समझौता
ईरान सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय की वेबसाइट पर इस समझौते के बारे में जानकारी प्रकाशित की गई है.
इसके मुताबिक़ ईरान और पाकिस्तान के पेट्रोलियम मामलों के विशेषज्ञों ने चार दिन चली बैठक में सभी समस्याओं को सुलझा लिया है और समझौते को अंतिम रुप दे दिया है.
ईरान के पेट्रोलियम मंत्रालय के विशेष प्रतिनिधि होजातुल्ला ग़ानिमीफ़र्द के अनुसार दोनों देशों के बीच गैस पाइपलाइन समझौते के अंतरिम मसौदे और सहमति पत्र पर अगले महीने के अंत तक हस्ताक्षर कर लिए जाएंगे.
भारत के इस समझौते में शामिल न होने के सवाल पर ग़ामिनीफ़र्द ने कहा, "भारत जब भी अपनी समस्याएँ सुलझा लेता है और इस समझौते में शामिल होने की इच्छा जताता है हम इसका स्वागत करेंगे और तब यह समझौता त्रिपक्षीय हो जाएगा."
माना जा रहा है कि इस बैठक में भारत के हिस्सा न लेने के पीछे परियोजना को लेकर पाकिस्तान से उसके मतभेद हैं.
इस वेबसाइट पर भारत के पेट्रोलियम राज्यमंत्री के ईरान को भेजे पत्र के हवाले से कहा गया है कि भारत को पाकिस्तान के साथ ट्राज़िट फ़ीस के मसले पर कुछ मतभेद दूर करने हैं.
लेकिन इस ईरान-पाकिस्तान समझौते के बाद पत्रकारों के सवाल के जवाब में पाकिस्तान के पेट्रोलियम सचिव फ़र्राख़ क़यूम ने इसका खंडन किया.
उनका कहना था, "पिछली बैठक में और इस बैठक में भारत के हिस्सा नहीं लेने के पीछे भारत की अपनी कोई अंदरूनी समस्या नज़र आती है. पाकिस्तान के साथ इस मसले पर कोई समस्या नहीं है."
परियोजना
ईरान-पाकिस्तान-भारत गैस पाइपलाइन परियोजना को पाकिस्तान और भारत की ऊर्जा ज़रूरतों को देखते हुए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इस गैस पाइपलाइन की कुल लंबाई 2600 किलोमीटर की है जिसमें से 760 किलोमीटर पाकिस्तान से होकर गुज़रेगा.
इसकी कुल लागत साढ़े सात अरब अमरीकी डॉलर होने का अनुमान है.
प्रस्ताव है कि वर्ष 2009-10 तक इस परियोजना को पूरा कर लिया जाए.
परियोजना पूरी हो जाने के बाद इससे 15 करोड़ क्यूबिक मीटर गैस प्रतिदिन मिलेगी जिसमें से एक तिहाई गैस का उपयोग पाकिस्तान करेगा और शेष का उपयोग भारत करेगा.