शनिवार, 29 सितंबर, 2007 को 20:29 GMT तक के समाचार
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने गेंद कांग्रेस के पाले में डालते हुए कहा है कि वह भारत-अमरीका परमाणु समझौते के मामले में कोई समझौता नहीं करेगी.
सीपीएम ने अपनी चेतावनी दोहराते हुए कहा है कि यदि यूपीए सरकार ने समझौते पर कोई क़दम न बढ़ाने की उनकी बात नहीं मानी तो वे 'समुचित क़दम' उठाएँगे.
सीपीएम ने कहा है कि उनकी नज़र यूपीए-वामदलों की समिति की बैठक पर है.
उल्लेखनीय है कि यूपीए-वामपंथी दलों की इस समिति की दो बैठकें हो चुकी हैं लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकला है.
यूपीए को बाहर से समर्थन दे रहे वामदलों को भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर आपत्ति है और वह चाहते हैं कि सरकार इस पर आगे न बढ़े क्योंकि यह देश के हित में नहीं है.
लेकिन यूपीए सरकार का कहना है कि यह समझौता देश के भविष्य के लिए आवश्यक है.
दोनों के बीच मतभेद को दूर करने के लिए एक समिति का गठन किया गया है लेकिन इससे दोनों ओर से बयानबाज़ी में कोई कमी नहीं आई है.
बैठक पर नज़र
कोलकाता में चल रही सीपीएम सेंट्रल कमेटी मीटिंग के बीच वरिष्ठ नेता ज्योति बसु ने कहा, "हम कोई समझौता नहीं कर सकते, देखते हैं कि कांग्रेस क्या करती है उसके बाद निर्णय लेंगे."
उनका कहना था, "हम पाँच और 14 अक्तूबर को होने वाली यूपीए-वामदल की बैठक में हम देखेंगे कि यूपीए सरकार क्या रुख़ अपनाती है, उसके बाद हम समुचित क़दम उठाएँगे."
ज्योति बसु ने बताया कि इस मसले पर विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने उनसे चर्चा की है. उल्लेखनीय है कि प्रणव मुखर्जी यूपीए-वामदलों की समिति के संयोजक भी हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार परमाणु समझौते और सरकार से समर्थन वापसी के मुद्दे पर सीपीएम के भीतर मतभेद की ख़बरों का खंडन करते हुए ज्योति बसु ने कहा, "परमाणु मसले पर पोलित ब्यूरो एकमत है और ऐसा ही नोट उसने सेंट्रल कमेटी की बैठक में रखा है."
उन्होंने कहा कि वे सभी विषयों पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें चुनाव की संभावना भी है और अब तक तो सेंट्रल कमेटी में सभी की राय एक जैसी है.
पार्टी के लोगों का कहना है कि सेंट्रल कमेटी की बैठक में परमाणु समझौते के मुद्दे पर चर्चा हुई है और इस पर रविवार को भी चर्चा होने की संभावना है.