शुक्रवार, 21 सितंबर, 2007 को 22:23 GMT तक के समाचार
एक ओर वामपंथी दल अमरीका के साथ हुए परमाणु समझौते के ख़िलाफ़ हमले तेज़ कर रहे हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस ने एक पुस्तिका प्रकाशित करके सफ़ाई दी है कि इसका स्वतंत्र विदेश नीति और सैन्य कार्यक्रम पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा.
कांग्रेस ने यह भी दलील दी है कि 123 परमाणु समझौते के बाद भारत के परमाणु परीक्षण करने के अधिकारों पर कोई असर नहीं होगा.
इस पुस्तिका के बारे में कांग्रेस ने कहा है कि 'समझौते पर आधी-अधूरी जानकारी, उसकी द्वेषपूर्ण निंदा और पक्षपात की राजनीति' का जवाब देने के लिए इसका प्रकाशन किया गया है.
दूसरी ओर सीपीआई का कहना है कि उनकी शंकाएँ जायज़ हैं और इस पत्रिका के ज़रिए कांग्रेस लोगों को अपने दृष्टिकोण से सहमत करने की कोशिश कर रही है.
यह उस समय हो रहा है जब यूपीए और वामदलों की एक समिति बन चुकी है और समझौते पर उभरे मतभेदों को दूर करने के प्रयास हो रहे हैं.
किसके लिए
21 पृष्ठों की इस पुस्तिका के बारे में कपिल सिब्बल ने बीबीसी से कहा कि यह पत्रिका उन लोगों के लिए निकाली गई है जो अफ़वाहें उड़ा रहे हैं, उन राजनीतिक दलों के लिए निकाली गई है जो अपने फ़ायदे के लिए इसका विरोध कर रहे हैं.
फिर उन्होंने कहा कि यह आमलोगों के लिए निकाली गई है ताकि वे इस जटिल समझौते के बारे में आसानी से जान सकें.
उन्होंने कहा, "जो कोई भी इसे पढ़ेगा वह कहेगा कि यह समझौता भारत के हित में है."
यह पूछने पर कि विरोध करने वाले राजनीतिक दलों से उनका आशय क्या यूपीए को समर्थन दे रहे वामपंथी दलों से है, तो उन्होंने कहा कि वे भाजपा के लिए ऐसा कह रहे हैं क्योंकि वामपंथी दलों की शंकाएँ दूर करने के लिए समिति बनी है और वहाँ बात हो रही है.
फिर उन्होंने कहा, "समिति में वामपंथी दल अपनी शंकाएँ सामने रख रहे हैं और उनका जवाब भी दिया जा रहा है लेकिन इस पुस्तिका से वे भी थोड़ा बहुत समझना चाहें तो यह उनके लिए भी है."
इस सवाल पर कि क्या आप एक तीर से दो निशाना साध रहे हैं, कपिल सिब्बल ने कहा, "बिल्कुल ठीक समझा आपने."
उधर सीपीआई के सचिव डी राजा ने बीबीसी से कहा कि वामपंथी दलों ने जो शंकाएँ समझौते को लेकर सामने रखी हैं वो वाजिब चिंताएँ हैं.
उन्होंने कहा कि पुस्तिका छापकर कांग्रेस लोगों को अपने नज़रिए से सहमत करने की कोशिश कर रही है.
उनका कहना था कि वामपंथी दलों ने कहा कि शंकाएँ दूर किए बिना सरकार क़दम न उठाए और सरकार को इसे मानना होगा.
पुस्तिका
कांग्रेस ने इस पुस्तिका में तर्क़ दिया है कि समझौता ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का रास्ता है.
समाचार एजेंसी के अनुसार पुस्तिका में कहा गया है, "इस समझौते से हमारी सैन्य परमाणु कार्यक्रम, हमारे त्रिस्तरीय परमाणु कार्यक्रम और हमारे शोध और विकास के कार्यक्रमों पर कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा."
पुस्तिका में सफ़ाई दी गई है, "हाइट क़ानून अमरीका का क़ानून है और यह भारत पर लागू नहीं होता.हमने अमरीका के साथ द्विपक्षीय समझौता किया है."
पुस्तिका के अनुसार हाइट क़ानून सिर्फ़ इस समझौते का रास्ता बनाने वाला क़ानून है.
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की इस पुस्तिका में कहा गया है कि यह समझौता 'एक ज़िम्मेदार सरकार द्वारा जनता की असल ज़रुरत को पूरा करने के लिए उठाया गया सही क़दम है.'
कांग्रेस ने कहा है कि यह दो संप्रभुता संपन्न देशों के बीच हुआ समझौता है और इसमें भारत बराबरी का एक साझीदार है.