शुक्रवार, 21 सितंबर, 2007 को 09:43 GMT तक के समाचार
बर्मा की राजधानी रंगून में शुक्रवार को लगातार चौथे दिन सैकड़ों बौद्ध भिक्षुओं ने सैनिक सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया. ये लोग तेल की क़ीमतें बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं.
15 मिनट के प्रदर्शन के दौरान बौद्ध भिक्षु उपदेशों और प्रार्थनाओं का पाठ करते रहे. इस दौरान किसी भी तरह की हिंसा की ख़बर नहीं है.
हालांकि पिछले महीने तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के ख़िलाफ़ आयोजित विरोध प्रदर्शनों को सेना ने सख़्ती से दबा दिया था और प्रदर्शनकारियों के कई नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया था.
गिरफ़्तार प्रदर्शनकारियों में से अधिकतर लोकतंत्र समर्थक उस छात्र संगठन के सदस्य हैं जिसने 1988 में प्रजातंत्र की बहाली के लिए चले आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई थी.
इससे पहले अमरीका और ब्रिटेन के राजदूतों ने बर्मा में बढ़ती राजनीतिक अशांति पर चिंता जताते हुए सुरक्षा परिषद से हस्तक्षेप की माँग की है.
अभियान
बर्मा की सैनिक सरकार ने 15 अगस्त को पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों को दोगुना करने की घोषणा की थी जिसके बाद से प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हुआ.
भिक्षुओं ने इससे पहले सरकार के विरोध में कम से कम पाँच शहरों में फिर प्रदर्शन किए हैं लेकिन सित्वे में सुरक्षा बलों ने भिक्षुओं को तितर-बितर करने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल किया था.
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ भिक्षुओं की पिटाई हुई और कई को गिरफ़्तार किया गया था.
उन्होंने देश भर में अपने अनुयायियों से कहा है कि सेना से जुड़े किसी भी व्यक्ति से दान दक्षिणा न ली जाए.
बर्मा के बौद्ध भिक्षुओं के एक नए संगठन ने यह विरोध अभियान शुरू किया है जिसका नेतृत्व युवा वर्ग के भिक्षु कर रहे हैं.
इस संगठन के प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने 1988 और 1990 में हुए प्रदर्शनों से सबक सीखा है जिसे सेना ने आसानी से दबा दिया था लेकिन इस बार उनके नेता जोखिम नहीं उठाएंगे और छिपे रहेंगे.