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गुरुवार, 20 सितंबर, 2007 को 15:47 GMT तक के समाचार

मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ जेहाद का ऐलान

अल-क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ जंग का ऐलान किया है और उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंकने आहवान किया है.

एक नए ऑडियो टेप में ओसामा बिन लादेन ने कहा है कि ऐसा ऐलान जुलाई 2007 में इस्लामाबाद की लाल मस्जिद में हुई सरकारी कार्रवाई के बदले में किया जा रहा है.

टेप में लादेन ने कहा है कि लाल मस्जिद में सेना का ऑपरेशन करके जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ काफ़िर बन गए हैं. ग़ौरतलब है कि लाल मस्जिद में जुलाई में 100 से ज़्यादा लोग मारे गए थे.

ओसामा बिन लादेन का यह ऑडियो संदेश इंटरनेट पर सुना गया है जहाँ पहले भी इस तरह के संदेश आते रहे हैं.

इस टेप में ओसामा बिन लादेन कहते हैं कि अब यह मुसलमानों का कर्तव्य बन गया है कि ऐसे 'धर्मत्यागी नेता' के ख़िलाफ़ बग़ावत कर दी जाए.

यह पहला मौक़ा नहीं है जब ओसामा बिन लादेन ने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को सत्ता से हटाने का आहवान किया है.

लेकिन बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता रॉब वॉटसन का कहना है कि ओसामा बिन लादेन की यह ताज़ा धमकी पाकिस्तान के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए काफ़ी महत्वपूर्ण हो सकती है.

बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सितंबर महीने के आरंभ में हुए एक एक्ज़िट पोल में दिखाया गया था कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ अपने ही देश में अल क़ायदा नेता ओसामा बिन लादेन के मुक़ाबले कम लोकप्रिय थे.

विवादास्पद

इस्लामी वेबसाइटों पर नज़र रखने वाले अमरीकी संस्थान इन्टेल सेंटर के अनुसार इस बारे में लादेन का वीडियो अगले दो-तीन दिनों के भीतर अल-सहाब वेबसाइट पर डाले जाने की संभावना है.

इससे पहले भी अल-सहाब की वेबसाइट पर अल-क़ायदा नेताओं के संदेश आते रहे हैं.

इस बीच अल-सहाब के ज़रिए अल-क़ायदा के दूसरे सबसे बड़े नेता अयमन अल-ज़वाहिरी का एक नया वीडियो सामने आया है जिसमें उन्होंने धमकी दी है कि पाकिस्तानी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को मौलवी अब्दुल रशीद ग़ाज़ी की हत्या की सज़ा दी जाएगी.

उल्लेखनीय है कि इस्लामाबाद की लाल मस्जिद में की गई सैनिक कार्रवाई में ग़ाज़ी मारे गए थे.

'धमकी को नज़रअंदाज़ किया'

ज़वाहिरी नए वीडियो में कहते हैं, "पाकिस्तानी सेना को इस बात का अहसास होना चाहिए कि अब्दुल रशीद ग़ाज़ी और उनके छात्र-छात्राओं की हत्या तथा मस्जिद को ज़मींदोज़ करने के उसके कृत्य ने उसके इतिहास पर एक शर्मनाक और बदनुमा दाग़ लगा दिया है. इस धब्बे को अब्दुल रशीद ग़ाज़ी के हत्यारों से बदला लेकर ही धोया जा सकता है."

पाकिस्तानी राष्ट्रपति और उनकी सेना को आड़े हाथों लेते हुए ज़वाहिरी ने कहा, "ये सैनिक पाकिस्तान की रक्षा का काम सौंपे जाने लायक़ नहीं हैं क्योंकि पाकिस्तान एक मुस्लिम राष्ट्र है जबकि मुशर्रफ़ की सेनाएँ बुश के ईसाई परचम तले जुटे शिकारी कुत्तों के समान हैं."

ज़वाहिरी ने मुसलमानों से अमरीका और उसके सहयोगी देशों के ख़िलाफ़ पूरी दुनिया में लड़ाई लड़ने का आहवान किया है.

पाकिस्तानी सेना ने अल-क़ायदा की नई चेतावनियों को गंभीरता से नहीं लेने की बात की है. सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल वहीद अरशद ने कहा, "हम पहले से ही चरमपंथियों और आतंकवादियों से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं. इस नीति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है."

मेजर जनरल अरशद ने कहा, "यदि कोई हमारे ख़िलाफ़ धमकी जारी कर रहा है, ये उनका अपना विचार है. पूरा राष्ट्र हमारे साथ है और पाकिस्तानी सेना एक पूरे राष्ट्र को स्वीकार्य संस्था है."

मुशर्रफ़ और उनकी सेनाओं के ख़िलाफ़ अल-क़ायदा की धमकी ऐसे समय आई है, जब पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने छह अक्तूबर को राष्ट्रपति चुनाव कराने की घोषणा की है.