बुधवार, 19 सितंबर, 2007 को 15:53 GMT तक के समाचार
नेपाल में सरकार से अलग हुए माओवादियों को मनाने की कोशिशें जारी हैं, इसके तहत राजधानी काठमांडू में सत्ताधारी गठबंधन और माओवादी नेताओं की एक बैठक हुई है.
दोनों पक्षों ने कहा है कि समस्या का हल बातचीत से निकालने के लिए वार्ताओं का दौर आगे चलाने पर सहमति हो गई है.
नेपाल में राजशाही को पूरी तरह समाप्त करने की माँग को लेकर माओवादियों का सरकार से अलग होना शांति प्रक्रिया के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है.
माओवादियों की माँग थी कि नवंबर में होने वाले संविधान सभा के चुनाव से पहले राजशाही को पूर्णतः समाप्त कर दिया जाए लेकिन नेपाल के प्रधानमंत्री का कहना था कि संविधान सभा को ही राजशाही का भविष्य तय करना चाहिए.
मंगलवार को सरकार से अलग होने वाले माओवादी मंत्रियों में से एक, देव गुरुंग ने कहा कि मुख्यधारा के राजनीतिक दलों से उनका संवाद बना हुआ है.
देव गुरूंग ने कहा, "हम विरोध प्रदर्शन और बातचीत दोनों साथ-साथ कर सकते हैं, बातचीत का रास्ता हमेशा खुला है, हम आशा करते हैं कि वे हमारी माँग को समझेंगे और मान लेंगे."
कोशिश
प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोईराला ने अभी तक माओवादी मंत्रियों के इस्तीफ़े को स्वीकार नहीं किया है, विशेषज्ञों का मानना है कि शायद सरकार को लगता है कि बातचीत से विवाद सुलझाया जा सकता है.
नेपाली सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री रामचंद्र पौडेल ने कहा कि सरकार माओवादियों को सरकार में वापस आने पर राज़ी करने के प्रयास कर रही है.
उनका कहना है कि सरकार चाहती है कि माओवादी 22 नवंबर को होने वाले चुनाव में हिस्सा लें लेकिन माओवादियों ने अपने रुख़ में नरमी के कोई संकेत नहीं दिए हैं.
एक माओवादी कमांडर अनंत ने पत्रकारों को बताया, "हम बुधवार से घर-घर जाकर लोगों से बात कर रहे हैं, हम राजशाही की समाप्ति जनआंदोलन के ज़रिए करना चाहते हैं."
मंगलवार को माओवादियों के दूसरे सबसे बड़े नेता बाबूराम भट्टराई ने चेतावनी दी थी कि अगर उनके कार्यकर्ताओं को धरना-प्रदर्शन करने से रोका गया तो हिंसा की घटनाएँ हो सकती हैं.
माओवादियों ने वादा किया है कि वे हथियारबंद संघर्ष के अपने पुराने रास्ते पर नहीं लौटेंगे.
दस वर्षों तक चले माओवादियों के हथियारबंद संघर्ष में 13 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो गई थी लेकिन यह उनके आंदोलन का ही नतीजा था कि पिछले वर्ष राजा ज्ञानेंद्र को सत्ता की कमान छोड़नी पड़ी थी.