सोमवार, 17 सितंबर, 2007 को 18:39 GMT तक के समाचार
केंद्र में सत्तरूढ़ गठबंधन की अगुआई कर रही कांग्रेस पार्टी में सेतुसमुद्रम परियोजना को लेकर खींचतान जारी है.
वाणिज्य राज्य मंत्री जयराम रमेश के बाद अब वरिष्ठ कांग्रेसी नेता आरके धवन ने कहा है कि इस मामले में संस्कृति मंत्री अंबिका सोनी को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए था.
उनका कहना था कि नैतिकता के आधार पर संस्कृति मंत्री अंबिका सोनी यदि पद से इस्तीफा देतीं तो अच्छा होता.
इससे पहले जयराम रमेश भी सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं कि अंबिका की जगह अगर वह होते तो नैतिकता के आधार पर इस्तीफ़ा दे देते.
सारा मामला सेतुसमुद्रम परियोजना पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के हलफ़नामे से शुरू हुआ जिसमें कहा गया कि रामायण और इसके पात्र मिथक हैं जिनका वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिलता है.
हिंदूवादी संगठनों के साथ-साथ केंद्र सरकार को समर्थन दे रहे वाम दलों ने भी इसे धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया जिसके बाद विवादास्पद हलफ़नामे को वापस लेने का फ़ैसला हुआ.
नैतिकता का तकाज़ा
कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य आरके धवन ने कहा कि अंबिका अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी को सौंप सकती थीं जिससे फ़ैसले का दारोमदार उन लोगों पर होता.
हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि जयराम रमेश को अंबिका सोनी के इस्तीफ़े के मुद्दे पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए थी.
उनका कहना था कि जयराम रमेश यह मामला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ उठा सकते थे.
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सलमान खुर्शीद पहले ही खुलकर अंबिका के समर्थन में सामने आ चुके हैं और उनके इस्तीफ़े की माँग को ख़ारिज कर चुके हैं.
उधर कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पार्टी के भीतर उपजे मतभेद के बारे में कहा, “कांग्रेस एक बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी है और नेताओं के निजी विचारों में अंतर दिखाई देना स्वाभाविक है.”