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रविवार, 16 सितंबर, 2007 को 13:27 GMT तक के समाचार

आसिफ़ फ़ारुक़ी
बीबीसी संवाददाता, उर्दू सेवा

विपक्षी दलों ने इस्तीफ़े की धमकी दी

पाकिस्तान में विपक्षी दलों ने कहा है कि अगर राष्ट्रपति जनरल मुशर्रफ़ फिर इस पद के लिए चुनाव लड़ते हैं तो वे राष्ट्रीय और प्रांतीय एसेंबलियों से इस्तीफ़ा दे देंगे.

इससे पहले पाकिस्तान में चुनाव आयोग ने कहा है कि देश के राष्ट्रपति सेना प्रमुख रहते हुए भी चुनाव लड़ सकते हैं.

इसके अलावा सरकारी कर्मचारी के तौर पर सेवानिवृत्त होने के दो साल बाद ही चुनाव लड़ने की पाबंदी भी उन पर नहीं होगी.

यानी जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ सेना अध्यक्ष का पद रखते हुए भी चुनाव लड़ सकेंगे.

विपक्षी दलों का गठबंधन सबसे पहले देश में आम चुनाव कराने की माँग कर रहा है लेकिन जनरल मुशर्रफ़ चाहते हैं कि उससे पहले वो दोबारा राष्ट्रपति पद के लिए चुन लिए जाएँ.

पिछले हफ़्ते निर्वासन तोड़ कर स्वदेश वापसी की कोशिश करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को दोबारा देश निकाला देने से भी विपक्षी दलों में नाराज़गी है.

इस बीच मुशर्रफ़ का विरोध कर रहीं पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो ने उनके सहयोगियों पर लोकतंत्र की बहाली की बज़ाए देश को अराजकता की ओर धकेलने का आरोप लगाया है.

ताज़ा फ़ैसले के बारे में पाकिस्तानी चुनाव आयोग के सचिव कुँवर मोहम्मद दिलशाद ने बीबीसी को बताया, " सुप्रीम कोर्ट ने साल 2005 और इससे पहले के अपने दो फ़ैसलों में कहा था कि संविधान की दफ़ा 63 राष्ट्रपति पद के लिए नहीं है. अब चूँकि राष्ट्रपति चुनाव नज़दीक है, इसलिए चुनाव आयोग के लिए अदालती फ़ैसले के तहत नियम में बदलाव ज़रूरी था."

उन्होंने कहा कि इस अदालती फ़ैसले पर अमल करते हुए मुख्य चुनाव आयोग ने नियम में बदलाव का सार पिछले हफ़्ते ही राष्ट्रपति को भिजवा दिया था जिसे राष्ट्रपति ने मंज़ूरी भी दे दी है और नियम में संशोधन की अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है.

संशोधन

जब पाकिस्तानी चुनाव आयोग के सचिव से राष्ट्रपति चुनाव की समयसारिणी के बारे में पूछा गया कि तो उन्होंने कहा कि इसकी अधिसूचना दो या तीन दिन तक आ जाएगी लेकिन आख़िरी तारीख़ का फ़ैसला अभी नहीं हुआ है.

चुनाव आयोग के इस फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ वकील जस्टिस रिटार्यड तारिक़ महमूद का कहना था कि इस संशोधन के बाद 'कोई पागल और अपराधी' भी पाकिस्तान का राष्ट्रपति बन सकता है.

उन्होंने कहा, जब सुप्रीम की नौ सदस्यीय बेंच राष्ट्रपति के पद और सेना की वर्दी से संबंधी याचिका पर सोमवार को सुनवाई शुरू कर रहा है तो इस किस्म का बदलाव संविधान और अदालत के साथ मज़ाक है.

वहीं मुस्लिम लीग नवाज़ के ख़्वाजा मोहम्मद आसिफ़ ने कहा है कि ऐसे वक़्त में जब देश नाज़ुक दौर से गुज़र रहा है, प्रशासन ने चुनाव आयोग के नियम में संशोधन करके नए संवैधानिक संकट का रास्ता खोल दिया है.

उन्होंने कहा कि अब अदालत को इस मसले का हल भी निकालना होगा कि इस अधिसूचना को भी अदालत में चुनौती दी जा सके.