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शनिवार, 15 सितंबर, 2007 को 14:08 GMT तक के समाचार

रामसेतु मामले में दो मंत्री आमने-सामने

रामसेतु मामले पर केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए हलफ़नामे पर विवाद अभी भी थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब केंद्र सरकार के दो मंत्री इस मसले पर आमने-सामने हैं.

कांग्रेस के नेता और केंद्र सरकार के वाणिज्य राज्यमंत्री जयराम रमेश ने इस मामले में केंद्रीय संस्कृति मंत्री अंबिका सोनी पर सीधा निशाना साधते हुए कहा है कि अगर वो संस्कृति मंत्री होते तो इतने विवाद के बाद इस पद से इस्तीफ़ा दे देते.

उन्होंने यह बातें कोलकाता में कुछ पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही.

ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार को सेतु समुद्रम परियोजना के संदर्भ में रामसेतु पर दिए गए अपना हलफ़नामा सुप्रीम कोर्ट से वापस लेना पड़ा है.

दाखिल हलफ़नामे में रामसेतु की ऐतिहासिकता के अलावा राम के अस्तित्व को भी अप्रमाणिक बताया गया था जिसके बाद विपक्ष और हिंदू संगठनों ने सरकार का विरोध शुरू कर दिया था.

अपनी ही पार्टी के एक नेता की ओर से इस तरह का बयान आने के बाद अंबिका सोनी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि अगर प्रधानमंत्री या यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी उनसे इस मामले में इस्तीफ़ा देने को कहेंगी तो वो तत्काल अपने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे देंगी.

'मैं जयराम रमेश नहीं'

उन्होंने कहा, "मैंने इस मामले से संबंधित सभी क़ाग़ज़ात प्रधानमंत्री और सोनिया जी के पास भेज दिए हैं. अगर उनको लगता है कि मैं इस्तीफ़ा दूँ तो मुझे अपना इस्तीफ़ा देने में एक मिनट का भी वक़्त नहीं लगेगा."

अंबिका सोनी ने जयराम रमेश पर इस बारे में पलटवार करते हुए कहा कि वे जयराम रमेश नहीं हैं.

इससे पहले अंबिका सोनी ने जापान यात्रा से लौटकर भारत पहुँचने के बाद पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाक़ात की.

इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी एएसआई के अधिकारियों की ओर से लापरवाही बरती गई है और जो भी लोग ज़िम्मेदार हैं, उसकी जाँच की जाएगी.

उधर तत्काल प्रभाव से एएसआई के दो आला अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया गया है.

अंबिका सोनी ने बताया कि इस मामले में अधिकारियों को हलफ़नामे में जो ज़रूरी सुधार करने के लिए कहा गया था वे नहीं किए गए जिसके कारण हलफ़नामे को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हुई.

पहले से ही रामसेतु पर अपने हलफ़नामे को लेकर विवादों से घिर चुकी केंद्र सरकार के लिए पार्टी के अंदर उपजा यह संकट चिंताओं को और बढ़ा रहा है.