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गुरुवार, 13 सितंबर, 2007 को 12:12 GMT तक के समाचार

हलफ़नामा वापस लेने का फ़ैसला

भारत सरकार ने सेतुसमुद्रम परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट में पेश विवादास्पद हलफ़नामे को वापस लेने का फ़ैसला किया है.

दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सरकार पर करोड़ों हिंदुओं का अपमान करने का आरोप लगाया है.

ताज़ा विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के हलफ़नामे से शुरू हुआ जिसमें कहा गया है रामायण एक मिथक है और इनके पात्रों के अस्तित्व का कोई प्रमाणिक आधार नहीं है.

इसमें कहा गया है कि रामेश्वरम से श्रीलंका के बीच कथित राम सेतु का कोई ऐतिहासिक और वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है.

हलफ़नामा दायर होने के बाद से ही हिंदूवादी संगठनों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया था.

इस बीच केंद्रीय क़ानून मंत्री हंसराज भारद्वाज ने गुरुवार को आनन-फ़ानन में बुलाए गए प्रेस कॉंफ़्रेंस में कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट पूरक हलफ़नामा दायर करेगी.

उन्होंने कहा कि पहले पेश किए गए हलफ़नामे के 'विवादास्पद' हिस्से को वापस ले लिया जाएगा.

'विवाद नहीं'

हंसराज भारद्वाज ने कहा कि राम के नाम पर विवाद की कोई वजह नहीं है. उन्होंने कहा कि हलफ़नामे के उस हिस्से को वापस ले लिया जाएगा जिसमें भगवान राम या रामायण के अन्य पात्रों के अस्तित्व पर प्रश्नचिन्ह लगाए गए हैं.

उन्होंने कहा, हम शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक और हलफ़नामा दायर करेंगे. यह पूछे जाने पर कि नए हलफ़नामे में क्या स्पष्टीकरण होगा, उनका कहना था, "यह हलफ़नामे में हमारे उस रूख़ से संबंधित होगा जिसके मुताबिक हमारे धर्मग्रंथों के इन पात्रों के अस्तित्व के सबूत नहीं हैं."

इससे पहले बुधवार रात को ही भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर यह हलफ़नामा वापस लेने की माँग की थी.

हिंदुओं का अपमान

भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी ने गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि सरकार ने जो हलफ़नामा दायर किया उससे देश-विदेश में रह रहे करोड़ों हिंदुओं का अपमान हुआ है.

उन्होंने कहा, "यह सत्तारूढ़ पार्टी की छद्म धर्मनिरपेक्षता का सबसे घिनौना उदाहरण है. राम सेतु से समस्या थी तो कोर्ट में कह दिया गया कि राम ही नहीं थे तो राम-सेतु कैसा. हिंदू समाज को छोड़ अन्य धर्मावलंबियों के बारे में ऐसी बात वे परोक्ष रूप से भी नहीं कर सकते."

आडवाणी ने कहा कि रामायण और महाभारत भारत की सांस्कृतिक एकता और अस्तित्व की परिचायक है.

उन्होंने कांग्रेस पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए कहा, "सरकार फ़ैसले करती है. फिर देखती है कि किसी ख़ास मुद्दे पर जन विरोध कितना है. उसके मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी हस्तक्षेप करती हैं और यही उनकी परिपाटी बन गई है जबकि सच्चाई यही है कि कोई भी फ़ैसला सोनिया गांधी की सहमति के बिना हो ही नहीं सकता."

भाजपा नेता ने विवादास्पद हलफ़नामे को तुरंत वापस लेने और प्रधानमंत्री से पूरे मामले पर माफ़ी माँगने की माँग की.