बुधवार, 12 सितंबर, 2007 को 12:33 GMT तक के समाचार
पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में मिंगोरा की पहाड़ियों में चरमपंथियों ने लगभग 1400 साल पुरानी बुद्ध प्रतिमा को धमाके से नष्ट करने की विफल कोशिश की है.
स्वात से बीबीसी संवाददाता रिफ़तुल्लाह औरकज़ई का कहना है कि लगभग पचास हथियारबंद लोगों ने उस स्थान पर धावा बोल दिया जहाँ ये मूर्ति है, वे अपने साथ ड्रिलिंग मशीन और डायनामाइट भी लाए थे.
बीबीसी संवाददाता ने बताया, "इन लोगों मूर्ति के आसपास रहने वाले लोगों को घरों से निकाल दिया और मूर्ति में छेद करके डायनामाइट लगाकर दो धमाके किए. उन्होंने लोगों के मोबाइल फ़ोन वग़ैरह भी छीन लिए थे इसलिए इसकी सूचना देर से मिल सकी."
रिफ़तुल्लाह औरकज़ई का कहना है, "मूर्ति को कोई नुक़सान तो नहीं पहुँचा है लेकिन उसके आसपास सुराख कर दिया गया है, इसलिए आशंका है कि कट्टरपंथी लोग उसे दोबारा ध्वस्त करने की कोशिश कर सकते हैं."
2001 में तालेबान लड़ाकों ने बामियान में मौजूद गौतम बुद्ध की प्राचीन विशाल प्रतिमाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था.
पुरातत्वविदों का कहना है कि बामियान बुद्ध की प्रतिमाओं के बाद भारतीय उपमहाद्वीप की ये सबसे प्राचीन और अहम बुद्ध प्रतिमाएँ हैं.
सभ्यता का गढ़
इन 1400 वर्ष पुरानी प्रतिमाओं के बारे में स्वात संग्रहालय के प्रमुख नासिर ख़ान ने बताया कि ये बहुत ही दुर्लभ मूर्ति है जो ऊँचे चट्टान को तराशकर बनाई गई है, इसमें बुद्ध को ध्यान की मुद्रा में बैठा दिखाया गया है.
नासिर ख़ान कहते हैं, "यह मूर्ति बहुत सुंदर है और बहुत अच्छी अवस्था में है, यह ऊँचाई पर है इसलिए इंसानी हाथ का इस तक पहुँचना मुश्किल है इसलिए यह मूर्ति बची रही है."
नासिर ख़ान का कहना है कि अब से पचास-साठ पहले तक स्वात घाटी में बौद्ध धरोहर बिखरी पड़ी थी लेकिन कुछ समय से लोगों ने इनको नुक़सान पहुँचाना शुरू कर दिया.
नासिर ख़ान कहते हैं, "इन मूर्तियों को नुक़सान पहुँचाने वाले आम लोग नहीं हैं बल्कि इक्का-दुक्का कट्टरपंथी लोग हैं जिनसे इस धरोहर को बचाने की ज़रूरत है."
पाकिस्तान में बुद्ध प्रतिमाओं को निशाना बनाने की यह पहली घटना है. पुलिस के अनुसार चरमपंथियों ने प्रतिमाओं को खंडित करने का प्रयास मंगलवार को किया.
स्वात घाटी को गंधार-बुद्ध सभ्यता का गढ़ माना जाता है. यह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है, क्योंकि यहाँ अब भी बड़ी संख्या में 2000 साल से भी अधिक पुरानी प्रतिमाएँ हैं.
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001 में अफ़ग़ानिस्तान में बामियान की बेजोड़ प्रतिमाएँ तालेबान शासकों ने यह कह कर तोड़ी थीं कि वे ग़ैर-इस्लामी हैं.
इस काम की विश्व भर में आलोचना हुई थी और तालेबान को रोकने के प्रयास भी किए गए थे.
लेकिन इस अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद तालेबान ने प्राचीन प्रतिमाओं को ध्वस्त कर दिया.