मंगलवार, 11 सितंबर, 2007 को 18:14 GMT तक के समाचार
भारत और अमरीका के बीच परमाणु समझौते के मुद्दे पर यूपीए और वाम दलों की 15 सदस्यीय समिति की बैठक में हाइड एक्ट के असर पर विचार करने का फ़ैसला किया गया.
विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में विचार विमर्श के मुद्दे तय किए गए.
समिति की अगली बैठक 19 सितंबर को होगी.
ग़ौरतलब है कि इस समिति का गठन परमाणु समझौते पर वाम दलों की आपत्तियों पर चर्चा के लिए किया गया है जिसके संयोजक प्रणव मुखर्जी हैं.
वाम दल लगातार अमरीका के साथ किए गए परमाणु समझौते का विरोध करते रहे हैं और समिति के गठन के बाद भी उनके रवैये में कोई नरमी नहीं आई है.
समिति की बैठक से पहले सोमवार को दिल्ली में एक राजनीतिक सम्मेलन में सीपीएम महासचिव प्रकाश कारत ने कहा था कि वो इस बात से सहमत नहीं हैं कि अमरीका प्रशासन के हाइड अधिनियम का असर भारत के साथ किए गए समझौते पर नहीं पड़ेगा.
समझौते के असर पर विचार
बैठक के बाद प्रणव मुखर्जी ने पत्रकारों को बताया कि बैठक में फ़ैसला किया गया कि समझौते का विदेश नीति और सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर भी विचार किया जाएगा.
इस बैठक में वामपंथी दलों की ओर से प्रकाश कारत, सीताराम येचुरी, एबी बर्धन, डी राजा और देवव्रत बिस्वास मौजूद थे.
कांग्रेस की ओर प्रणव मुखर्जी के अलावा एके एंटनी, पी चिदंबरम, कपिल सिब्बल, सैफुद्दीन सोज़, पृथ्वीराज चौहान, आरजेडी के लालू प्रसाद यादव, डीएमके के टीआर बालू और एनसीपी के शरद पवार उपस्थित थे.
बैठक के बाद सीपीआई महासचिव एबी बर्धन से ये पूछे जाने पर कि क्या कोई विशेषज्ञों को अगली बैठक के लिए बुलाया जाएगा, तो उनका जवाब था कि किसी विशेषज्ञ की ज़रूरत नहीं है.
वाम दलों का कहना है कि जब तक उनकी चिंताओं का निराकरण नहीं हो जाता और समिति अपनी रिपोर्ट नहीं दे देती तब तक भारत को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ बातचीत स्थगित कर देनी चाहिए.
उल्लेखनीय है कि 14 सितंबर को भारतीय परमाणु ऊर्जा विभाग के प्रमुख अनिल काकोदकर विएना जा रहे हैं जहाँ वो आईएईए की बैठक में हिस्सा लेंगे.