मंगलवार, 11 सितंबर, 2007 को 14:56 GMT तक के समाचार
रामदत्त त्रिपाठी
बीबीसी के उत्तर प्रदेश संवाददाता
उत्तर प्रदेश में मायावती सरकार ने पिछली मुलायम सरकार के कार्यकाल के दौरान भर्ती किए गए 6500 पुलिस सिपाहियों को नौकरी से बर्ख़ास्त करने का फ़ैसला किया है.
भारतीय पुलिस सेवा के 12 वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किया गया है.
मायावती सरकार ने मुलायम सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई लगभग 22 हज़ार पुलिसकर्मियों की भर्ती की जाँच के लिए एक समिति का गठन किया था जिसकी अध्यक्षा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शैलजाकांत मिश्र ने की थी.
उत्तर प्रदेश के प्रमुख गृह सचिव जेएन चेंबर ने संवाददाताओं को बताया कि जाँच के आधार पर सरकार ने ये फ़ैसला किया है. महत्वपूर्ण है कि इन भर्तियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ होने के आरोप लगे थे.
बारह निलंबित
चेंबर ने बताया कि जिन 12 आईपीएस अधिकारियों को निलंबित किया गया है उनमें आईजी, डीआईजी और एसपी स्तर के अफ़सर शामिल हैं.
इसके अलावा प्रांतीय पुलिस सेवा (पीपीएस) के 58 पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ भी विभागीय कार्रवाई की जा रही है.
चेंबर का कहना था, "आपराधिक मामला होने के कारण पुलिस की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा इस मामले में आगे कार्रवाई करेगी. कई उम्मीदवारों के प्रमाण पत्र फ़र्ज़ी पाए गए, जबकि मेरिट लिस्ट में हेरा-फेरी के भी सबूत मिले हैं."
लेकिन वे ये सवाल टाल गए कि क्या इस पूरे मामले में किसी राजनीतिक नेता का हाथ होने की बात भी सामने आई है या नहीं.
महत्वपूर्ण है कि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल यादव ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस को संबोधित करते हुए कहा है, "यदि इस पूरे मामले में मेरी कोई भूमिका साबित होती है तो मैं राजनीति से सन्यास ले लूँगा."
प्रमुख गृह सचिव चेंबर का कहना था कि फ़िलहाल 16 हज़ार भर्तियों के मामले की जाँच लंबित है और इस बारे में दो हफ़्ते में फ़ैसला हो जाएगा.
उनका ये भी कहना था कि इस पूरे प्रकरण में जो पद रिक्त होंगे उन्हें अगले छह महीने में भरा जाएगा. उनके अनुसार नई भर्ती प्रक्रिया में वो उम्मीदवार भी भाग ले सकेंगे जिन्होंने मुलायम सिंह सरकार के कार्यकाल के दौरान परीक्षा दी थी और जिनके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है.