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सोमवार, 10 सितंबर, 2007 को 01:31 GMT तक के समाचार

लौट के नवाज़ सऊदी अरब आए

सात साल तक निर्वासित जीवन बिताने के बाद सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचे पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ को वापस सऊदी अरब भेज दिया गया है.

उनका विमान अब से चंद मिनट पहले जद्दा एयरपोर्ट पर उतर गया है.

इससे पहले इस्लामाबाद हवाईअड्डे पहुँचने पर उन्हें हिरासत मे ले लिया गया था.

एयरपोर्ट पर नवाज़ शरीफ़ को लेकर विमान कऱीब साढे नौ बजे पहुंचा लेकिन उन्हे विमान से उतरने नहीं दिया गया.

नवाज़ शरीफ़ और सरकार के प्रतिनिधियों के बीच करीब डेढ़ घंटे तक बातचीत हुई और नवाज़ शरीफ़ से उनका पासपोर्ट माँगा गया लेकिन उन्होंने अपना पासपोर्ट अधिकारियों के हवाले करने से मना कर दिया.

इस्लामाबाद पहुँचने के बाद नवाज़ शरीफ़ ने कहा, "अपनी सरज़मीन पर पहुँच कर मुझे वो खुशी हो रही है कि मैं बयान नहीं कर सकता. मैं ये संदेश देना चाहता हूँ कि सब मिलकर लोकतंत्र की बहाली के लिए काम करें."

उधर पाकिस्तान में कई स्थानों पर नवाज़ शरीफ़ के समर्थकों ने प्रदर्शन किया और पुलिसकर्मियों ने उन्हें तितर बितर करने के लिए लाठीचार्ज भी किया.

शरीफ़ के आने से पहले मीडिया को भी एयरपोर्ट से दो किलोमीटर दूर रोक दिया गया था और एयरपोर्ट के पास मोबाइल फोन भी जाम कर दिए गए.

देश में सार्वजनिक रैलियों पर प्रतिबंध लगा दिया है और एयरपोर्ट को चारों ओर से सुरक्षा बलों ने घेर रखा था.

इस्लामाबाद एयरपोर्ट के रास्ते में पुलिस ने अवरोध लगा दिए थे और हर जगह पुलिसकर्मी तैनात है क्योंकि बड़ी संख्या में लोग नवाज़ शरीफ़ का स्वागत करने एयरपोर्ट जाना चाहते थे.

बीबीसी संवाददाता शाहज़ेब ज़िलानी के अनुसार कल रात नवाज़ शरीफ़ की पार्टी मुस्लिम लीग नवाज़ के कार्यालयों पर छापे मारे गए और कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है.

नवाज़ की रवानगी

नवाज़ शरीफ़ रविवार की देर रात पीआईए के विमान से लंदन से इस्लामाबाद रवाना हुए लेकिन उनके भाई शाहबाज़ शरीफ़ साथ नहीं गए.

नवाज़ शरीफ़ ने लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यदि उन्हें गिरफ़्तार किया गया तो यह देश के स्वतंत्रता के लिए छोटी सी कीमत होगी.

दूसरी ओर शाहबाज़ शरीफ़ ने बताया है कि नवाज़ शरीफ़ ने उन्हें अभी पाकिस्तान जाने से मना किया है.

बीबीसी के साथ बातचीत में शाहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि वे तो पाकिस्तान जाना चाहते थे लेकिन उनके बड़े भाई नवाज़ शरीफ़ ने मना कर दिया.

उन्होंने कहा, " मैंने बड़ी कोशिश की लेकिन उनका हुक्म है. और वो नहीं मान रहे. मैं इससे मायूस हूँ. लेकिन मेरे लीडर ने मुझे सख़्ती से रोका है. मैं क्या कर सकता हूँ."

लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि वे बहुत जल्दी ही पाकिस्तान जाएँगे.

उनका कहना था कि ये अहम मौक़ा है, इतने सालों बाद अपने वतन के विमान में बैठ रहा हूँ.

ग़ौरतलब है कि कुछ दिन पहले पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्वदेश लौटने की अनुमति दे दी थी.

1999 में नवाज़ शरीफ़ का तख़्ता पलट दिया गया था और अगले साल उन्हें पाकिस्तान से निर्वासित कर दिया गया था.