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शनिवार, 08 सितंबर, 2007 को 21:13 GMT तक के समाचार

सलमान रावी
कालाहांडी से

उड़ीसा में विपक्षी दलों का बंद का आव्हान

उड़ीसा में कालाहांडी में अनाज की कमी और दूषित पानी पीने से सैंकड़ों लोगों के मारे जाने के बाद अब विपक्षी दलों ने सोमवार, 10 सितंबर को राज्यव्यापी बंद का आव्हान किया है.

बंद का आव्हान करने वाले कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इस इलाक़ों में लोगों के लिए अनाज और दवा के इंतज़ाम की माँग की है और उस एजेंट को गिरफ़तार करने की माँग की है जिसने पैसे लेकर अनाज नहीं पहुँचाया.

इस बीच कालाहांडी के कुछ इलाक़े में शनिवार को अनाज पहुँचा है और लोगों ने मीलों पैदल चलकर थोड़ा-थोड़ा अनाज हासिल किया है.

लेकिन दूरस्थ इलाक़ों में अभी भी अनाज नहीं पहुँचा है.

राज्य सरकार मानने को तैयार नहीं है कि इन लोगों की मौत की असली वजह भूख है. सरकार का कहना है कि ये लोग हैज़ा और डायरिया जैसी पेट की बीमारियों से मरे हैं.

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दूसरी ओर कालाहांडी के सांसद ही स्वीकार कर चुके हैं कि स्थिति गंभीर है और जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत अनाज पहुँचाने की प्रक्रिया चरमरा गई है.

इस बीच राज्य सरकार ने अनाज वितरण में लापरवाही बरतने के आरोप में चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया है.

सरकारी आँकड़ों की मानें तो अब तक 180 लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन ये हैज़ा और दस्त से मरे हैं.

दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय राहत संस्था एक्शन एड मरने वालों की संख्या लगभग 350 बता रहा है और इसने बीमारियों के अलावा भूख को भी एक बड़ा कारण बताया है.

बंद का आव्हान

मीडिया में भूख और बीमारी की ख़बरें आने के बाद राजनीतिक दलों को अनाज और दवा आपूर्ति की याद आई है.

उड़ीसा के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और वामपंथी दलों ने मिलकर सोमवार, 10 सितंबर को राज्यव्यापी बंद का आव्हान किया है.

उनकी माँग यह भी है कि उस एजेंट को गिरफ़्तार किया जाए जिसने पैसे लिए और उस इलाक़े में अनाज नहीं पहुँचाया.

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता भक्त चरण दास ने उड़ीसा में नई फसल को लेकर मनाए जाने वाले पर्व नुआखाई के दिन से 72 घंटों की भूख हड़ताल करने की घोषणा की है.

यह पर्व 16 सितंबर को मनाया जाना है.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि उनकी माँग उस एजेंट की गिरफ़्तारी और उससे पैसे की तत्काल वसूली है. उनका कहना है कि एजेंट कम से कम 80 लाख रुपए ले गया है.

इस बीच भवानीपटना रोड पर अनाज से भरी गाड़ियाँ सड़क से गुज़रती हुई दिखाई दी हैं.

कुछ जगह पर लोगों को अनाज भी बाँटा गया है. अनाज लेने के लिए लोग मीलों पैदल चलकर यहाँ पहुँचे और पोटलियों में अनाज लेकर वापस लौट गए.