शुक्रवार, 07 सितंबर, 2007 को 06:22 GMT तक के समाचार
उड़ीसा के कालाहांडी से सांसद बिक्रम केशरी देव ने स्वीकार किया है कि उनके क्षेत्र में खाने की कमी और बीमारियों के कारण काफी मौतें हुई हैं.
दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि भुखमरी की ख़बरें निराधार हैं और मौतें बीमारियों के कारण हुई है.
ग़ौरतलब है कि खाने की भारी कमी और पेट की बीमारियों की मार झेल रहे उड़ीसा के कालाहांडी ज़िले में मरने वालों की कुल संख्या सैकड़ों में जा पहुँची है.
राज्य सरकार मानने को तैयार नहीं है कि इन लोगों की मौत की असली वजह भूख है, राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री मनमोहन सामल ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ये लोग हैज़ा और डायरिया जैसी पेट की बीमारियों से मरे हैं.
वहीं कालाहांडी से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद बिक्रम केशरी देव ने बीबीसी को बताया, "ये बात सही है कि स्थिति विकराल है. मैंने इस मामले को संसद में भी उठाया था. दरअसल राज्य सरकार स्थिति से निपटने में आर्थिक रूप से अक्षम है."
अनाज वितरण में समस्या
उन्होंने बताया कि पहले दूर दराज़ के गाँवों तक अनाज पहुँचाने के लिए मोबाइल वैन चला करती थी लेकिन राज्य सरकार ने इसे बंद कर दिया.
उन्होंने कहा, "मैंने राज्य सरकार ने मोबाइल वैन के ज़रिए जनवितरण प्रणाली के तहत अनाज बँटवाने की प्रक्रिया फिर शुरू करने की माँग की है."
सांसद ने बताया कि शुक्रवार को उड़ीसा के स्वास्थ्य मंत्री प्रभावित इलाक़ों का दौरा कर रहे हैं.
कालाहांडी के दूर-दराज़ के इलाक़े में मौजूद बीबीसी संवाददाता सलमान रावी का कहना है कि उन्हें ऐसे अनेक लोग मिले हैं जो बाँस के छिलके, पत्तों और आम की गुठलियों को उबालकर खा रहे हैं क्योंकि उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं है.
कई लोगों का कहना है कि वे इसलिए बीमार हैं क्योंकि उन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है.
राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री ने बार-बार कहा कि इन मौतों का भूख से कोई संबंध नहीं है, उन्होंने कहा, "कालाहांडी में जो लोग मरे हैं वे पेट की हैज़ा जैसी बीमारियों से मरे हैं, इसमें जो ग़रीबी का चित्रण किया जा रहा है वह ग़लत है."
लेकिन कालाहांडी के सांसद ने खाद्य आपूर्ति मंत्री के बयान का खंडन करते हुए कहा, "ये मेरा क्षेत्र है. मुझे ज़्यादा पता होगा कि वहाँ क्या हो रहा है. ये सच है कि काफी लोग प्रभावित हुए हैं."