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शुक्रवार, 07 सितंबर, 2007 को 17:29 GMT तक के समाचार

ट्रक खाई में गिरा, सौ से अधिक मरे

दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के पाली और राजसमंजद ज़िले की सीमा पर देसुरी में तीर्थयात्रियों से खचाखच भरा एक ट्रक खाई में जा गिरा.

पाली के ज़िलाधीश कर्णसिंह राठौर के अनुसार इस हादसे में सौ से अधिक लोग मारे गए हैं और 60 से अधिक घायल हैं.

मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएँ भी हैं. सभी शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं.

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया दुर्घटनास्थल की ओर रवाना हो गई हैं. वो पहले मादरी गाँव जाएंगी जहाँ के 29 लोग इस दुर्घटना में मारे गए हैं.

अधिकारियों का कहना है कि देसुरी के पास एक नाले के एक सँकरे मोड़ पर ट्रक असंतुलित होकर नाले में जा गिरा.

घटना रात को साढ़े सात से आठ बजे के आसपास हुई है.

राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारजनों को 50-50 हज़ार रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है.

घायलों का इलाज

पाली के ज़िलाधीश ने देर रात बीबीसी को बताया कि वे सौ से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि करने की स्थिति में हैं.

उनका कहना है कि इस हादसे में 60 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

इनमें से 35 का इलाज राजसमंद में हो रहा है और 21 लोगों को पाली के बांगड़ अस्पताल भेजा गया है. 12 लोगों का इलाज देसुरी में ही हो रहा है.

घायलों में कई लोगों की हालत गंभीर है और कुछ लोगों को इलाज के लिए उदयपुर भी भेजा गया है.

इस सवाल पर कि मृतकों की संख्या इतनी अधिक होने का क्या कारण था, ज़िलाधीश ने कहा, "हादसा ही इतना भीषण था कि ज़्यादातर मौतें घटनास्थल पर ही हो गई थीं."

उनका दावा है कि घायलों को यथासमय इलाज के लिए ले जाया गया.

खचाखच भरा था ट्रक

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दस चक्के वाले बड़े ट्रक में कम से कम दो सौ लोग सवार थे जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएँ भी थीं.

उनका कहना है कि ट्रक में लकड़ी के पटरे डालकर दो मंज़िलें बना ली गई थीं और दोनों मंज़िलों में लोग भरे हुए थे.

ये सभी लोग ग़रीब परिवारों के थे और वे पश्चिमी राजस्थान में पोखरण के पास रामदेवरा के तीर्थ स्थान को जा रहे थे जहाँ इन दिनों बड़ा मेला चल रहा है.

देसुरी, जहाँ घटना घटी है वह राजसमंद ज़िला मुख्यालय से 40 किलोमीटर की दूरी पर है.

ये सभी लोग देसुरी के आसपास के गाँवों के रहने वाले लोग हैं. जबकि मेला स्थल वहाँ से लगभग 450 किलोमीटर दूर है.

पाली के ज़िलाधीश का कहना है कि इस तरह के मेले में जाने वाले लोग अक्सर इस तरह की असुरक्षित यात्रा करते हैं.

उनका कहना था कि प्रशासन की ओर से उन्हें रोका जाता है तो वे नाराज़ होते हैं लेकिन इस हादसे से समझना चाहिए कि ऐसी यात्रा ठीक नहीं है.