गुरुवार, 06 सितंबर, 2007 को 15:04 GMT तक के समाचार
शालिनी जोशी
देहरादून से
उत्तराखंड के कुमांऊ मंडल के धारचूला इलाके में भूस्खलन से भारी तबाही हुई है. 15 लोग मारे गए हैं और कई लोगों के घायल होने का समाचार है. आशंका है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है.
उत्तराखंड में बारिश का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है. पिछले करीब एक महीने से लगातार हो रही बारिश से सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त है यहाँ के लोग बादल फटने और भूस्खलन के ख़तरे के साये में जी रहे हैं.
अधिकारियों के अनुसार मंगलवार से पिथौरागढ़ में लगातार मूसलाधार बारिश हो रही थी और गुरुवार तड़के यहाँ की धारचूला तहसील के तीन गांव भूस्खलन की चपेट में आ गए.
यहाँ पहाड़ टूट कर गिरने लगे जिससे कई मकान ढह गए और उसके मलबे में 15 लोग ज़िंदा दब गए, कई घायल हो गए और सैकड़ों मवेशी भी मारे गए.
आशंका
मलबा अभी पूरी तरह हटाया नहीं जा सका है और आशंका जाहिर की जा रही है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है.
राज्य के मुख्यमंत्री जनरल भुवन चंद खंडूरी ने बताया, "राहत और बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिए गए हैं, आईटीबीपी भेज दी गई है, मंत्री और अधिकारी वहाँ जाकर ख़ुद इंतजाम देख रहे हैं. जितनी जल्दी हो सकेगा मलबा साफ़ कर दिया जाएगा और सामान्य स्थिति बहाल की जाएगी."
राज्य सरकार ने मृतकों के परिवारों को एक-एक लाख रू. और घायल लोगों को 20-20 हजार देने की घोषणा की है. ख़राब मौसम के कारण राहत और बचाव कार्य में मुश्किल आ रही है.
पिछले एक महीने में भूस्खलन की ये तीसरी बड़ी घटना है. इस बीच राज्य के कई इलाक़ों में भारी बारिश जारी है और मसूरी, धनोल्टी, बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले मार्ग बाधित हैं.
पिछले एक महीने में बारिश की वजह से गढ़वाल और कुमांऊ में 100 से ज़्यादा लोगों की मृत्यु हो गई है और करोड़ों की संपत्ति का नुक़सान हुआ है.