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गुरुवार, 06 सितंबर, 2007 को 13:17 GMT तक के समाचार

मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ सुनवाई 17 सितंबर से

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के दो पदों पर रहने संबंधी संवैधानिक याचिका पर 17 सितंबर से सुनवाई करने का फ़ैसला किया है.

मुख्य न्यायाधीश इफ़्तेख़ार चौधरी की अध्यक्षता में सात सदस्यीय बेंच का गठन किया गया है जो जमाते इस्लामी के नेता क़ाज़ी हुसैन अहमद की याचिका पर सुनवाई करेगी.

अदालत में एटॉर्नी जनरल मलिक मोहम्मद क़यूम ने मामले की सुनवाई के ख़िलाफ़ दलील देते हुए कहा कि संविधान के नियमों के तहत सुनवाई नहीं हो सकती.

मलिक मोहम्मद क़यूम ने कहा कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ आगामी राष्ट्रपति चुनाव में वर्दी में या वर्दी के बग़ैर हिस्सा ले सकते है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इसके अलावा सेनाध्यक्ष के ओहदे पर भी बने रह सकते हैं.

एटॉर्नी जनरल ने कहा, "इस याचिका के मूल में बदनीयती है."

क़यूम ने कहा कि अभी ये फै़सला नहीं हुआ है कि परवेज़ मुशर्रफ़ सेनाध्यक्ष की वर्दी में या वर्दी के बग़ैर चुनाव लड़ेंगे.

एटॉर्नी जनरल का कहना है कि संविधान के अनुसार दो पदों पर रहने की गुंजाइश है और परवेज़ मुशर्रफ़ चाहें तो सेनाध्यक्ष बने रह सकते हैं. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनके दो पदों पर रहने से संविधान के किसी प्रावधान का उल्लंघन नहीं होता है.

दूसरी ओर, जमाते इस्लामी के अध्यक्ष की ओर दायर याचिका में कड़े शब्दों में कहा गया है कि एक व्यक्ति के लिए संविधान में परिवर्तन कर दिया गया है जो अनुचति है, याचिका में कहा गया है कि एक व्यक्ति के दोनों पदों पर रहते हुए लोकतंत्र नहीं हो सकता.

विरोध प्रदर्शन

इस बीच पाकिस्तान भर में वकीलों ने मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ ज़ोरदार प्रदर्शन किए हैं, वकीलों ने अदालत के कामकाज में भी हिस्सा नहीं लिया.

लाहौर, पेशावर और क्वेटा में सैकड़ों की तादाद में वकीलों ने हिस्सा लिया और 'मुशर्रफ़ को सदर नहीं बनने देंगे' जैसे नारे लगाए.

प्रदर्शनकारी वकीलों का कहना है कि उनकी लड़ाई अब दूसरे दौर में दाख़िल हो गई है, पहले दौर में उनका मक़सद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पद पर बहाल करवाना था, अब उनका उद्देश्य हर हाल में मुशर्रफ़ को राष्ट्रपति चुने जाने से रोकना है.

क्वेटा में हुए विरोध प्रदर्शनों में बेनज़ीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के ख़िलाफ़ भी नारे लगाए गए, वकीलों का कहना था कि बेनज़ीर एक सैनिक शासक से समझौता कर रही हैं जो उन्हें मंज़ूर नहीं है.